इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भगवान गणेश की आराधना का पर्व तिल चतुर्थी शुक्रवार को मनाया गया। सौभाग्य और संतान की मंगल कामना से महिलाओं ने चतुर्थी का व्रत रखा। तिल चतुर्थी पर्व पर गणेश मंदिरों में विशेष तैयारी की गई हैं। खजराना गणेश मंदिर और बड़ा गणपति मंदिर में एक दिन पहले गुरुवार को ही भगवान गणेश का अभिषेक कर उनका विशेष श्रृंगार कर दिया गया था ताकि चतुर्थी पर भक्त अपने आराध्य का निर्बाधित रूप से दर्शन कर सकें। सुबह से ही शहर के गणेश मंदिरों में भक्तों का दर्शनों के लिए तांता लगा रहा। ज्योतिर्विदों के अनुसार रात 9.14 बजे चंद्रोदय होगा।

खजराना गणेश मंदिर में इस बार कोरोना महामारी के कारण तिल चतुर्थी मेला नहीं लग रहा है, लेकिन प्रतिवर्षानुसार इस बार भी भगवान गणेश को तिल-गुड़ के 51 हजार लड्डुओं का भोग लगाया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट के अनुसार सुबह 10.30 बजे कलेक्टर मनीष सिंह, निगमायुक्त प्रतिभा पाल, पुलिस आयुक्त हरिनारायणाचारी मिश्र व अन्य अधिकारियों ने ध्वज पूजन कर उत्सव का आरंभ किया। इसके साथ ही तिल-गुड़ से बने 51 हजार लड्डुओं का भोग भी भगवान को लगाया। मंदिर में दर्शन के लिए चार लाइन लगाई गई थी और सभी को विशेष मंच बनाकर दर्शन कराए जा रहे हैं। मंदिर रात 10.30 बजे तक खुला रहेगा।

स्वर्ण आभूषणों से हुआ श्रृंगार

भगवान गणेश, रिद्धि-सिद्धि और लाभ-शुभ का अभिषेक कर मोती जड़ित वस्त्र पहनाए गए। इसके बाद स्वर्ण आभूषणों से सभी का श्रृंगार किया गया। सभी को स्वर्ण मुकुट पहनाए गए। रिद्धि-सिद्धि को स्वर्ण मंगलसूत्र, गणेशजी को स्वर्ण चंद्रिका, स्वर्ण तिलक और स्वर्ण छत्र से सजाया गया।

गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ

बड़ा गणपति मंदिर में 25 किलो सिंदूर और 14 किलो घी से गणेशजी को चोला चढ़ाया गया। इसके बाद रेशमी वस्त्र, मोती की माला और चांदी के मुकुट, छत्र, चांदी का दांत, हाथ-पैर में चांदी के कड़े और चांदी के लड्डू से भगवान का श्रृंगार किया। मंदिर के पुजारी धनेश्वर दाधीच के अनुसार वर्ष में चार बार गणेशजी की इस 25 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी मूर्ति का विशेष श्रृंगार किया जाता है। हर बार सवा मन घी-सिंदूर का चोला गणेशजी को चढ़ाया जाता है। तिल चतुर्थी पर मंदिर में सुबह 9 से 11 बजे तक पांच पंडितों द्वारा गणपति अथर्वशीर्ष का 101 बार पाठ किया और 11 किलो तिल के लड्डू का भोग लगाया गया। कोरोना के कारण भक्तों को चलित दर्शन कराए, मंदिर में रुकने की अनुमति नहीं है।

शमीपत्र, दूर्वा और तिल-गुण से करें पूजा

ज्योतिर्विद विजय अड़ीचवाल के अनुसार माघ माह की इस चतुर्थी का बहुत महत्व है। गणेश पुराण के अनुसार इस चतुर्थी पर आद्य गणेश का प्राकट्य हुआ था इसलिए इस दिन गणेशजी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन भूमि पुत्र मंगल को गणेशजी ने अपने 10 भुजाओं वाले दिव्य रूप का दर्शन कराया था। इस दिन गणेशजी को शमी पत्र और दूर्वा के साथ तिल-गुड़ चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। दिनभर यथा शक्ति व्रत रखकर रात में गणेशजी व चंद्रमा की पूजा करें, उसके बाद व्रत का पारण करें। शहर में चंद्रोदय रात 9.14 बजे होगा।

Posted By: Hemraj Yadav

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