इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इंदौर-खंडवा रोड पर बने उमरीखेड़ा एडवेंचर्स पार्क खुलने का पर्यटक बेसब्री से इंतजार करने में लगे है, जो जल्द ही खत्म होने जा रहा है। ईको टूरिज्म और वन विभाग ने 20 जून से पार्क पर्यटकों के लिए शुरू करने का विचार किया है। दो दिन पहले इको टूरिज्म की अधिकारी स्मिता राजौरा ने पार्क का निरीक्षण किया और पंद्रह दिनों के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए। पर्यटकों के लिए मल्टीपल ट्रैक यानी विभिन्न प्रकार के ट्रैक बनाए जा रहे हैं।

मात्र पैदल जंगल देखने वालों के लिए दो किमी का समतल ट्रैक रखा है, जबकि एडवेंचर्स ट्रैकिंग वालों के लिए पहाड़ी पर थोड़ी ऊंचाई का ट्रैक तैयार हो रहा है, जो पांच से छह किमी लंबा होगा। वहीं जंगल सफारी के लिए ट्रैक रखा है, जहां मात्र वाहन से घूमा जा सकेगा। इसके लिए आठ से दस किमी का ट्रैक बना रहा है।

शहर से पंद्रह किमी दूर उमरीखेड़ा वनक्षेत्र में नेचर एडवेंचर्स पार्क 190 हेक्टेयर में फैला है। दस किमी की सफारी में पर्यटकों वन्यजीव देखने का भी अनुभव मिलेगा, क्योंकि सियार-लकड़बग्धा, नील गाय की संख्या काफी है। साथ ही विभाग ने अब रेस्क्यू कर जानवरो पार्क में छोड़ने का विचार किया है। इसके लिए मुख्यालय में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूछा गया है। यहां से सहमति आने के बाद जानवरों के लिए एनिमल जोन तैयार होगा। शनिवार को ईको टूरिज्म की महिला अधिकारी ने पार्क में शाम आठ बजे तक निरीक्षण किया।

डीएफओ नरेंद्र पंडवा और रेंजर जयवीर सोलंकी को अधूरे काम पूरे करने को कहा है। डीएफओ पंडवा का कहना है कि दस से बीस प्रतिशत काम बचा हुआ है। इन्हें जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। वैसे जून अंत तक पार्क खोलने की योजना है।

ये काम हुए पूरे

- उमरीखेड़ा में कोई होटल, ढाबा या रेस्टोरेंट नहीं बनाया जाएगा। मगर वहां जर्जर व पुराने भवन की मरम्मत कर ली है।

- वनक्षेत्र में दो तालाब रहेगा। दूसरे का गहरीकरण का काम चल रहा है।

- उमरीखेड़ा में आने वाले पर्यटकों के लिए खान-पान की व्यवस्था भी रखी है। यहां एक पुराने भवन को कैफेटेरिया में तब्दील किया जा रहा है।

- पार्क में आने वालों के लिए टिकट रखा जाएगा। इसके लिए टिकट घर का काम अंतिम चरणों में चल रहा है।

- खूबसूरत फूल का एक बगीचा भी बनाया है। बारीश बाद इनमें पौधे लगाए जाएंगे।

- पेड़-पौधों की मोबाइल पर जानकारी मिल सके इसके लिए क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। लगभग 45 से ज्यादा दुर्लभ प्रजाति वाले पेड़ों की जानकारी जुटाई जा रही है।

Posted By: Sameer Deshpande

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