इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में ट्रैफिक को नंबर वन बनाने का प्रयास कई दिनों से चल रहा है लेकिन जवाहर मार्ग पर ही यातायात के जो बद्तर हालात हैं, उससे लगता है इस पर काबू पाना मुश्किल है। पटेल ब्रिज से लेकर नंदलालपुरा चौराहे तक सुबह 11 बजे से शाम सात बजे तक गाड़ियों की गुत्थम-गुत्था होती रहती है। इसकी वजह यह है कि सियागंज में एक हजार से ज्यादा कारोबारी हैं, जिनका माल लोडिंग रिक्शा में आता है और इसकी शुरुआत सुबह छह बजे से ही हो जाती है। ट्रांसपोर्ट नगर, लोहा मंडी से जो माल आता है, वो जवाहर मार्ग होते हुए ही सियागंज, कपड़ा मार्केट, बर्तन बाजार की तरफ जाता है।

सियागंज के एक है हिस्से में रात ग्यारह से सुबह छह बजे तक बड़ी गाड़ियों की अनुमति है, लेकिन छोटी गाड़ियों की इजाजत तो सुबह से रात तक रहती है। सैफी होटल से लेकर सियागंज की दोनों तरफ की गलियों में शाम होते ही जाम लग जाता है। चौंकाने वाली बात तो ये है कि जिनको जिम्मा दिया गया है, वो इंट्री पर ध्यान देते हैं। एक अनुमान के अनुसार रोजाना तीन सौ से चार सौ लोडिंग रिक्शा यहां पर आती हैं। छोटी गाड़ियों से बीस रुपये और बड़ी गाड़ियों से पचास रुपये लिए जाते हैं, जबकि इनका एक समय तय हो जाए, तो ट्रैफिक की समस्या हल हो सकती है, लेकिन ऐसा होता दिखता नहीं है। कपड़ा मार्केट में भी ऐसे ही हालात बने थे, तब व्यापारियों ने तय किया था कि एक ही समय पर गाड़ियां बुलाई जाएंगी और दो घंटे में माल आता था। सियागंज में ऐसा नहीं है और इसी वजह से यहां पर गाड़ियों की आपाधापी मची रहती है।

रविवार होने से यहां शाम को हालात तो ठीक थे, लेकिन पुलिस वाले नदारद थे। रानीपुरा, सैफी होटल और ब्रिज के पास में पुलिस वाले खड़े रहते हैं, जो रविवार को नहीं थे। नंदलालपुरा पर जरूर सहायक थानेदार एसएन भारती और दो सिपाही एक तरफ खड़े होकर ट्रैफिक संभाल रहे थे। गुरुद्वारे पर पुलिस वाले चालान में मशगूल और लोग अपने हिसाब से निकल रहे थे। जवाहर मार्ग पर एलिवेटेड ब्रिज का प्रस्ताव बन चुका था, लेकिन विधायकों के विरोध के बाद वो अटक गया। नंदलालपुरा चौराहे से लेकर सैफी होटल तक सड़क के दोनों ओर कब्जे रहते हैं । दुकानदारों ने सर्विस रोड पर भी कब्जा कर रखा और सामान जमा रखा है।

बीच में बैरिकेड्स लग गए हैं, लेकिन गाड़ी निकलने की इतनी जगह नहीं बची है कि जाम को रोक सकें इसी वजह से सुबह से शाम तक यहां दिन में कई बार जाम लग जाता है। सिटी बस के फंसते ही एक बार में आधे घंटे की छुट्टी हो जाती है। लोग इस रास्ते से निकलना ज्यादा पसंद नहीं करते हैं। संजय सेतु का रास्ता जरूर वरदान साबित हो गया है, लेकिन एमजी रोड (गणेश कैप मार्ट) का रास्ताबंद होने से दवाब जवाहर मार्ग पर बढ़ गया है। राजवाड़ा इलाके में महालक्ष्मी मंदिर के सामने भी दिनभर गाड़ियां गुत्थम-गुत्था होती रहती हैं। यहां भी पुलिस का जोर नजर नहीं आता। प्रिंस यशवंत रोड पर खड़ी गाड़ियों के कारण ट्रैफिक बिगड़ता रहता है। ट्रैफिक पुलिस अक्सर हड़काती रहती है, फिर भी कभी ई-रिक्शा तो कभी वैन और मैजिक वाले ट्रैफिक की व्यवस्था बिगाड़ देते हैं।

Posted By: Sameer Deshpande

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