इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सुपर कारिडोर पर बने आठ लेन पुल की एक लेन का कुछ भाग क्षतिग्रस्त होने से इंदौर विकास प्राधिकरण में हलचल मची हुई है। प्राधिकरण ने पुल की मरम्मत शुरू की है, वहीं प्रकरण की जांच भी कराई जा रही है। मरम्मत होने तक पुल की क्षतिग्रस्त लेन में 10 दिन तक आवागमन बंद रहेगा। शुक्रवार को प्राधिकरण मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरपी अहिरवार ने मुंबई की कंसल्टेंट कंपनी और ठेकेदार कंपनी के इंजीनियरों के साथ पुल का मुआयना किया। इस दौरान तय किया कि क्षतिग्रस्त हो चुकी पूरी लेन को जांचा जाएगा। यदि लेन का अन्य भाग भी कमजोर पाया गया तो उसे भी उखाड़कर मरम्मत की जाएगी।

इस बीच प्राधिकरण अध्यक्ष जयपालसिंह चावड़ा ने भी क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि अभी हमारी प्राथमिकता यह है कि क्षतिग्रस्त पुल को ठीक किया जाए। पुल में गड्ढा बनकर यह क्यों टूटा यह तो विस्तृत और तकनीकी जांच के बाद पता चलेगा, लेकिन प्रथमदृष्ट्या ऐसा प्रतीत होता है कि पुल के निर्माण में खराब या एक्सपायरी सीमेंट का उपयोग किया गया है। पुल के इस हिस्से में निर्माण के लिए हल्के स्तर की सीमेंट का उपयोग किया गया होगा। पुल निर्माण में कंसल्टेंट कंपनी, ठेकेदार कंपनी या प्राधिकरण के जिस इंजीनियर की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराएंगे। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की लेन में अन्य जगह भी मशीन से जांच करेंगे कि किसी और जगह पुल कमजोर तो नहीं है? यदि ऐसा होगा तो उस हिस्से में भी सीमेंट-कांक्रीट हटाकर मरम्मत की जाएगी।

छह साल पहले बना था पुल - सुपर कारिडोर का यह आठ लेन पुल लगभग छह साल पहले बनकर तैयार हुआ था। इसके निर्माण में 43 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। मुंबई की कंपनी टेक्नोझेम को प्राधिकरण ने कंसल्टेंट बनाया था। साथ ही कल्याण टोल कंपनी को निर्माण का ठेका दिया था। प्राधिकरण की ओर से कार्यपालन यंत्री अनूप धकेता व अनिल चुघ, सहायक यंत्री राजीव सक्सेना, उप यंत्री यशवंत वर्मा की देखरेख में पुल का निर्माण हुआ था। फिलहाल अब यह जांच का विषय है कि पुल के निर्माण में कहां, किस तरह की खामी रही जिससे यह इतने कम समय में ही क्षतिग्रस्त हो गया।

Posted By: Hemraj Yadav

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