मालवा-निमाड़ (टीम नईदुनिया), Trauma center in Malwa Nimar। अंचल में गंभीर रूप से घायलों के इलाज के नाम पर आज भी स्वास्थ्य विभाग सिर्फ कागजी खानापूर्ति ही करता नजर आ रहा है। जहां हादसों में गंभीर घायलों के लिए आकस्मिक चिकित्सा केंद्र स्थापित किए गए, वहां कई स्थानों पर ना तो डाक्टर हैं और ना ही स्टाफ। इतना ही नहीं जरूरी मशीनें भी नहीं हैं।इस बारे में सवाल पूछने पर विभाग रटारटाया जवाब ही देता है कि पर्याप्त चिकित्सकीय अमला नहीं है। अंचल के जिलों के ट्रामा सेंटर की पड़ताल करती नईदुनिया की रिपोर्ट...

धार : 10 साल पहले बना, लेकिन अब तक कोई डाक्टर नहीं

जिला मुख्यालय पर ट्रामा सेंटर करीब 10 साल पहले बना था। इसका वर्तमान में उपयोग ओपीडी और महिलाओं के आपरेशन के लिए किया जा रहा है, जबकि सेंटर सड़क दुर्घटना में आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए होता है। इसके लिए डाक्टर नहीं हैं।

रतलाम : अब तक नहीं लगी सीटी स्कैन मशीन

जिले में एकमात्र जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर है, जहां सड़क दुर्घटना में घायल लोगों का इलाज होता है। सीटी स्कैन मशीन अभी तक नहीं है। मशीन लगाने की तैयारी चल रही है।

खंडवा : हादसे में घायल भर्ती होते हैं, आपरेशन नहीं हो पाते

खंडवा में जिला अस्पताल में 2014 में शुरू हुए ट्रामा सेंटर में दुर्घटना में घायलों को सिर्फ भर्ती कराया जा रहा है। आपरेशन नहीं हो पाते। यहां डाक्टर व स्टाफ मिलाकर 60 पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल में 1.75 करोड़ से ट्रामा सेंटर बनाया गया था।

बड़वानी : 30 बेड का सेंटर बन चुका है कोविड वार्ड

बड़वानी जिला अस्पताल परिसर में लगभग तीन वर्ष पूर्व शुरू हुआ ट्रामा सेंटर दो वर्षों से कोविड वार्ड बना हुआ है। शुभारंभ के बाद मशीनों की कमी के चलते काम नहीं हुआ और जब सी-आर्म व अन्य मशीनें आई तो कुछ समय बाद कोरोना संक्रमण के चलते ट्रामा सेंटर को बंद कर दिया गया। फिलहाल 30 बेड का यह सेंटर वार्ड कोविड वार्ड रूप में उपयोग किया जा रहा है।

खरगोन : सर्जिकल वार्ड को बनाया था कोविड वार्ड

खरगोन जिला अस्पताल में संचालित ट्रामा सेंटर एक सप्ताह पहले ही शुरू हुआ, क्योंकि कोरोना संक्रमण की वजह से जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड को कोविड वार्ड बना दिया गया था। तब सर्जिकल वार्ड को ट्रामा सेंटर में शिफ्ट किया गया था। जिला अस्पताल के डा. दिलीप सेप्टा ने जानकारी दी कि सेंटर में मरीजों का इलाज और आपरेशन किए जा रहे हैं।

स्टाफ की कमी, इंदौर रेफर हो रहे मरीज

बुरहानपुर : शहर में ट्रामा सेंटर जिला अस्पताल में बनाया है, लेकिन स्टाफ की भर्ती नहीं होने से यह शुरू नहीं हो पाया। मंदसौर में अभी ट्रामा सेंटर नहीं बना है। कागजों पर ही यह झूल रहा है।

आगर : जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर बने करीब पांच साल हो गए, किंतु आज तक शुरू नहीं हो पाया। इसके लिए स्टाफ ही नहीं है।

देवास : जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर है, जिसमें सीटी स्कैन से लेकर ओटी की सुविधा है। लेकिन स्टाफ की कमी है। न्यूरो सर्जन नहीं होने से हेड इंज्यूरी के केसों को इंदौर रेफर करना पड़ता है।

ट्रामा सेंटरों में स्टाफ की नियुक्ति जल्द होने वाली है। जहां पर उपकरणों की कमी है वहां से इसके लिए डिमांड भेजी जानी चाहिए। इसके आधार पर शासन स्तर पर प्रक्रिया पूरी होगी। जिलों में जल्द ही निरीक्षण भी किया जाएगा। - डा. अशोक डागरिया, क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य

Posted By: Prashant Pandey

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