इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। निगम के अफसर छोगालाल उस्ताद मार्ग पर बुधवार को जो पेड़ गिरने का कारण पेड़ के पास जमीन में बनी पानी की टंकियों को बता रहे है। निगम के उद्यान अधिकारी दिलीप चौहान के मुताबिक जिस स्थान पर पेड़ गिरा था उसके तीन फुट के अंदर ही दुकानदारों ने रोड पर ही अंडरग्राउंड पानी की दो टंकियों का निर्माण किया गया है। जो पेड़ गिरा मजबूत था लेकिन उसकी जड़े कीड़े या खोखला होने के कोई भी प्रमाण नहीं मिले। जब इन टंकियों का निर्माण किया होगा उस दौरान पेड़ की जड़े काटी गई। इस वजह से पेड़ नीचे से कमजोर हुआ है। इन टंकियों के कारण ही ये पेड़ बुधवार को गिरा। ऐसे में हम यह भी जांच करेंगे कि किसी पेड़ के आसपास इस तरह की अंडरग्राउंड टंकी का निर्माण तो नहीं किया गया जिसके कारण भविष्य में पेड़ों के गिरने के कारण दुर्घटना की स्थिति निर्मित न हो।

बारिश के पानी की निकाली के लिए बनाई ड्रेनेज चेम्बर की टंकी-

जानकारी के मुताबिक जिस इमारत के सामने यह पेड़ गिरा वो निगम के पूर्व अपर आयुक्त पृथ्वीराज धुलधोए का घर है और वहां पर कुछ दुकानें बनी हैं। उनके स्वजनों के मुताबिक यह पेड़ ढाई सौ साल पुराना है। हमारा मकान 40 साल पहले बना है। घर के सामने जमीन में ड्रेनेज चेम्बर के लिए टंकी का निर्माण किया गया है। जब बारिश में यहां नाले का पानी भरता तो वो घरों के अंदर आ जाता था। ऐसी स्थिति के लिए ड्रेनेज की टंकी बनाई थी ताकि पानी उसमें चला जाए। हमें उस टंकी की आज तक जरूरत नहीं पड़ी न उसका उपयोग किया गया। यदि पेड़ टंकी के कारण गिरता तो टंकी व ओटला क्षतिग्रस्त हो जाते। ऐसे में निगम के अफसरों द्वारा टंकी निर्माण के कारण पेड़ का गिरना बताया जाना गलत है, जबकि पेड़ सूख जाने व खोखला हाेने के कारण गिरा है।

अति खतरनाक पेड़ों को काटा जाएगा

बारिश के पहले खतरनाक पेड़ों की सूची बनाई जाती है। जो भी शिकायते आती है उनका मौके पर निरीक्षण कर निगम द्वारा अावश्यक कार्रवाई की गईं। हमने उद्यान विभाग की टीम को अभी तक मिली शिकायतों की मौके पर सूक्ष्मता से जांच पड़ताल कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। जिन स्थानों पर अति खतरनाक पेड़ होंगे उन्हें काटा जाएगा। गुरूवार को हमने उद्यान विभाग के कटाई दरोगा व जोन नंबर 11 के दरोगा को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा है।

- कैलाश जोशी, उपयायुक्त उद्यान विभाग

सीमेंटीकरण व पेवर ब्लॉक से भी कमजोर होते है पेड़-

कई पेड़ों के नीचे लोग सीमेंटीकरण कर अवैध निर्माण लेते है। इससे पेड़ों की जड़ों तक हवा व पानी पहुंच पाता है। इससे जड़े कमजोर होती जाती हैं। इसके अलावा शहर में कई फुटपाथ व रोड के निर्माण के दौरान पेड़ के चारों ओर सीमेंटीकरण व पेवर ब्लाॅक लगा दिए जाते है। इस वजह से भी पेड़ की जड़े कमजोर होती है बाद में वह गिर जाता है। यही वजह है कि एक साल पहले पूर्व निगमायुक्त आशीष सिंह ने निर्देश दिए थे कि पेड़ों के तनों की मोटाई के अनुरूप आधे से एक मीटर दूरी तक पेड़ के आसपास सीमेंटीकरण या पेवर ब्लॉक न लगाए जाए। उस समय में जोनल कार्यालयों के माध्यम से कुछ स्थानों पर पेवर हटाए गए थे। हालांकि अब भी कई स्थानों पेड़ों के आसपास पेवर व सीमेंट हटाया बाकी है।

Posted By: sameer.deshpande@naidunia.com

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