इंदौर, राघवेन्द्र बाबातेज आंधी, बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट से डरकर दो साल पहले एक तोता घर से निकल गया, लेकिन वापस नहीं लौटा। उसकी जुदाई के गम में परिवार हफ्तेभर ठीक से खाना तक नहीं खा सका। इसके बाद सभी उसके आने की उम्मीद भी खो चुके थे। एक दिन जब तोता अपने परिवार के पास लौटा और उसने परिवार के लोगों का नाम लेना शुरू किया तो सब हैरान रह गए।

मनपसंद कॉलोनी में रहने वाले देवेन्द्र ईनानी ने 9 साल पहले दो तोते खरीदे थे। रामू और गोपी नामक पहाड़ी तोते इतने घुल-मिल गए कि उन्हें परिवार के सदस्यों के नाम याद हो गए। दो साल पहले एक रात रामू घर की मंुडेर पर बैठा था, तभी तेज बारिश शुरू हो गई।

बादलों की गरज सुन रामू घबराया और उड़ता चला गया। बारिश थमने के बाद रामू नहीं दिखा तो पूरा घर, मोहल्ला और इलाके की छानबीन की गई। सोशल मीडिया पर भी रामू का फोटो वायरल किया गया, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। घटना के बाद ईनानी परिवार मनपसंद कॉलोनी से एक किलोमीटर दूर कान्यकुब्ज नगर में रहने आ गया। इस बीच रामू की याद में गोपी भी परेशान रहने लगा।

देखने के बाद भी नहीं पहचानी मालकिन

पिछले सप्ताह राधा ईनानी (पत्नी) घर में सो रही थी, तभी पड़ोस की महिलाओं ने दरवाजा खटखटाया और कहा- 'आपका तोता बाहर बैठा है, उसे अंदर कर लो।" राधा उठी तो देखा कि गोपी पिंजरे में ही था। फिर बाहर जाकर देखा तो वैसा ही तोता बैठा हुआ दिखा। वे पहचान नहीं पाईं कि वही उनका खोया हुआ रामू है। फिर भी वे उसे अंदर ले आई और घर में छोड़कर अपने काम में लग गईं।

पुरानी चोट देखकर पहचाने

शाम को जब बेटी कुच्ची अपने ससुराल से घर आई तो तोते ने 'कुच्ची दीदी" पुकारा। यह सुन राधा हैरान थी। थोड़ी देर बाद देवेंद्र आए तो उन्हें देखते ही वह 'पापा...पापा..." बोलने लगा। देवेंद्र ने तोते को गौर से देखा तो उसकी बचपन की चोट को देखकर पहचान गए। अब रामू और गोपी की जोड़ी फिर से बन चुकी है।

इस बार होगा खास बर्थडे

ईनानी परिवार रामू और गोपी का जन्मदिन धूमधाम से मनाता था। मोहल्ले के बच्चों को लाकर केक काटते और पार्टी होती थी। दो साल से यह आयोजन बंद था, लेकिन इस बार रामू के लौटने पर फिर 10 फरवरी को खास दिन मनाया जाएगा।

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