Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन एवं इंदौर सीए शाखा द्वारा कंपनी एक्ट के महत्वपूर्ण प्रावधानों एवं आडिट रिपोर्टिंग प्रावधानों पर सेमिनार का आयोजन को टीपीए हाल में किया गया। सीएस डीके जैन ने कंपनी नियम 2014 में हुए परिवर्तनों के बारे में बताया कि अब कंपनी कानूनों का समय पर अनुपालन अनिवार्य हो गया है। यदि दो या अधिक बार नान कम्प्लायंस होता है तो कंपनी को हायर पेनल्टी वहन करना पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि कंपनी एक्ट 2013 के शिड्यूल 3 जो कि फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स तैयार करने से सम्बंधित हैं, में काफी अमेंडमेंटस हुए हैं जो कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से लागू हो गए हैं जिसमें नए डिस्क्लोजर नियम लागू किए गए हैंl कंपनी आडिटर को इन सभी डिस्क्लोजर नियम को अपनी रिपोर्ट में उल्लेखित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन नए डिस्क्लोजर नियम से कम्पनी के इन्वेस्टर्स, बैंक एवं फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन्स को कंपनी के सम्बन्ध में अधिक जानकारी पूरी पारदर्शिता से प्राप्त होगी। नए डिस्क्लोजर में आडिटर को कंपनी द्वारा किए गए बेनामी ट्रांसेक्शन, विल फुल डिफाल्ट, रिलेटेड पार्टी एवं प्रमोटर्स को दिए गए ऋण, कंपनी के द्वारा आयकर के सर्वे-सर्च के दौरान किए गए सरेंडर का एकाउंटिंग ट्रीटमेंट तथा वहां किए जाने वाले टैक्स इत्यादि का भी डिस्क्लोजर देना होगा।

सीए विक्रम गुप्ते ने कम्पनी आडिटर्स रिपोर्ट आर्डर (कारो) के बारे में बताते हुए कहा कि नए कारो 2020 आडिटर को कंपनी के लगभग सभी क्षेत्र के बारे में रिपोर्ट करना होगी। पुराना कारो 2016 जहां सिर्फ कम्पलायंस पर आधारित था। कारो 2020 कम्पलायंस के अतिरिक्त कम्पनी के आर्थिक स्वास्थ्य, सॉल्वेंसी, कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर भी आडिटर से कमेन्टस की अपेक्षा रखता है। कारो 2020 ग्रुप के कंसोलिडेटेड फाइनेंसियल स्टेटमेंट पर भी एप्लीकेबल है जबकि पूर्व में ग्रुप के कंसोलिडेटेड फाइनेंसियल स्टेटमेंट पर कारो में रिपोर्टिंग नहीं था। उन्होंने कहा कि पूर्व के मुकाबले में आडिटर को नई रिपोर्टिंग आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए रिबूस्ट आडिट प्रोसीजर अपनाने की जरूरत है।

Posted By: Sameer Deshpande

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