Packaged Food लोकेश सोलंकी, इंदौर। बेसन के लड्डू, गजक और चिक्की जैसी भारतीय मिठाइयां अस्वास्थ्यकर घोषित हो सकती हैं। पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के लिए एफएसएसआइ द्वारा प्रस्तावित नए नियमों पर अमल हुआ तो तमाम मिठाइयों और नमकीन पर ऐसा ही लेबल लगा नजर आएगा। देशभर के मिठाई-नमकीन निर्माताओं ने नए नियमों का विरोध शुरू कर दिया है। इसे बिना सोचे-समझे की जा रही विदेश की नकल और भारतीय व्यंजनों की परंपरा को खत्म करने वाला करार दिया जा रहा है। देशभर के मिठाई-नमकीन उद्योग के सर्वोच्च संगठन फेडरेशन आफ स्वीट्स एंड नमकीन मैन्यूफैक्चरर्स (एफएसएनएम) ने नियमों का विरोध करते हुए प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है।

एफएसएनएम ने एफएसएसआइ के सीईओ एस गोपालकृष्णन को देशभर के मिठाई-नमकीन उद्योगों की ओर से ज्ञापन भेजा है। फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार जैन ने नियमों को भारतीय खान-पान के अनुसार अव्यावहारिक करार दिया है। मप्र के मिठाई-नमकीन निर्माता भी लेबलिंग के नए नियमों के विरोध में फेडरेशन के साथ हैं।

बिना सोचे-समझे विदेशी पैकिंग स्टैंडर्ड को देश में लागू कर रहे

एफएसएनएम के डायरेक्टर फिरोज नकवी ने नईदुनिया से बात करते हुए कहा कि बिना सोचे-समझे विदेशी पैकिंग स्टैंडर्ड को देश में लागू किया जा रहा है। जिन देशों से यह नियम लिया जा रहा है, वहां संपूर्ण भोजन पैकेटबंद होता है, जबकि मिठाई और नमकीन संपूर्ण भोजन नहीं है। इन्हें खास त्योहारों पर या खाने के साथ सिर्फ थोड़ी मात्रा ने लिया जाता है। अभी तो सरकार इस लेबलिंग को चार वर्ष के लिए ऐच्छिक लागू करने की तैयारी कर रही है। आगे इसे अनिवार्य कर दिया जाएगा।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ दिलाने केलिए ऐसा कर रहे

नकवी ने बताया कि सीधे तौर पर देश के मिठाई-नमकीन कारोबारियों को नुकसान पहुंचाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इससे लाभ मिलेगा। यह रैंकिंग चाकलेट, कंफेक्शनरी के लिए हो सकती है, परंपरागत खाद्य पदार्थों के लिए नहीं। हैरानी है कि फूड फार स्पेशल डायटरी यूज यानी प्रोटीन पाउडर, जूस जैसे पैकेटबंद उत्पाद भी इस पैमाने पर अनहेल्दी घोषित हो जाएंगे। उद्योग प्रभावित होगा और भारतीय खाद्य परंपरा भी खत्म होने लगेगी।

देश में सालाना कारोबार

नमकीन उद्योग : 728 अरब रुपये

मिठाई कारोबार : 589 अरब रुपये

यह है प्रस्ताव : मप्र मिठाई-नमकीन निर्माता एसोसिएशन के सचिव अनुराग बोथरा के अनुसार प्रस्तावित नए नियमों में पैक्ड खाद्य पदार्थों में नमक, शकर और फैट की मात्रा के आधार पर स्टार या लाल निशान लगाने का प्रस्ताव दिया गया है।

प्रस्तावित नियम : 100 ग्राम या 100 मिली मात्रा में हाई फैट साल्ट और शुगर के आधार पर खाद्य पदार्थों की रैंकिंग की जा रही है।

नई रैंकिंग में यह होगा : बेसन के लड्डू हो या रसगुल्ला, गुलाबजामुन या गजक जैसी तमाम मिठाइयां को पांच से कम सिर्फ दो या ढाई अंक मिल रहे हैं। इनके पैकेट पर अस्वास्थकर (अनहेल्दी) फूड का लेबल लग जाएगा।

आगे क्या होगा : ऐसा होने पर लोगों की धारणा बदलेगी और परंपरागत व्यंजनों से लोग बचने लगेंगे। ऐसे में नमकीन और मिठाई उद्योग केकारोबार को भारी नुकसान होगा।

Posted By: Sameer Deshpande

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