इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। समान नागरिक संहिता को लेकर नागरिकों और संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित किए गए थे। इस संबंध में व्यापक चर्चा के लिए रिफार्म आफ फैमिली ला के शीर्षक से एक परामर्श पत्र भी जारी किया गया है। जैसे ही विधि आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होगी, आगे आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

यह मजमून है उस पत्र का जो इंदौर की संस्था न्यायाश्रय को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे पत्र के जवाब में प्राप्त हुआ है। संस्था के अध्यक्ष अधिवक्ता पंकज वाधवानी ने बताया कि हिजाब विवाद के बाद बने अस्थिरता के माहौल को हमेशा के लिए समाप्त करने के उद्देश्य से संस्था ने पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग करते हुए एक पत्र प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय को लिखा था। संस्था ने संभागायुक्त को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा था। हाल ही में संस्था को दोनों ही कार्यालयों से जवाब प्राप्त हुए हैं। इसमें कहा है कि शीघ्र ही देश में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। इसके लिए विधि आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है।

यह लिखा था पत्र में - वाधवानी ने बताया कि पत्र में हमने लिखा था कि कर्नाटक के स्कूली शिक्षा अधिनियम के तहत उठे हिजाब विवाद को राष्ट्र विरोधी तत्वों ने देश की वैश्विक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से नया मोड़ दे दिया है। राष्ट्र विरोधी तत्वों द्वारा नागरिकों में यह भावना उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है कि अल्पसंख्यक खतरे में है। इन तत्वों का उद्देश्य देश में अस्थिरता लाना और सामाजिक वैमनस्यता फैलाना है। शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में किसी प्रकार का कोई धर्म, लिंग, जाति, रंग, वर्ण, जन्म स्थान इत्यादि किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो, इसलिए पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करना जरूरी है।

संविधान में ही समान नागरिक संहिता लागू करने की बात - संस्था द्वारा लिखे गए पत्र में यह भी कहा था कि संविधान में ही अनुच्छेद 44 के अंतर्गत समान नागरिक संहिता को लागू किए जाने की बात कही गई है। बाबा साहेब आंबेडकर ने भी देश में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने की बात पर जोर दिया था। उसके बाद भी अब तक इसे क्रियान्वित नहीं किया गया।

Posted By: Hemraj Yadav

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