DAVV Exam: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। 2022-23 सत्र के लिए देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से संचालित पाठ्यक्रम में दिसंबर तक विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है। प्रवेश प्रक्रिया में देरी का असर अब विश्वविद्यालय के एकेडमी कैलेंडर पर दिखने लगा है। यूजी-पीजी कोर्स के पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं जहां दिसंबर में करवाई जाती थी। मगर इस बार दो-तीन महीने पिछड़ चुकी है। फरवरी में पहले सेमेस्टर की परीक्षा होगी। जबकि अगले सत्र को पटरी पर लगाने के लिए विश्वविद्यालय ने सेमेस्टर ब्रेक और अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर विद्यार्थियों के लिए सत्र को पटरी पर लगाने का विचार किया है। फिलहाल सभी विभागों को अपने-अपने तरीके से व्यवस्था करने पर जोर दिया है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देश पर केंद्रीय व राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) करवाई गई, जिससे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के 44 यूजी-पीजी कोर्स जुड़े गए। करीब 3300 सीटों पर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाना था। यूजी और पीजी कोर्स के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने अलग-अलग परीक्षा करवाई। ये परीक्षाएं सितंबर में खत्म हुई। बाद में एजेंसी को रिजल्ट निकलने में भी समय लगा। इस लेटलतीफी के चलते विश्वविद्यालय में अक्टूबर अंतिम सप्ताह में काउंसलिंग शुरू हुई। देरी के चलते इस बार विश्वविद्यालय को विद्यार्थी नहीं मिल रहे है। चार चरण की काउंसलिंग के बावजूद सीटें नहीं भर पाई है। 7 दिसंबर तक पीजी कोर्स में सीएलसी के माध्यम से विद्यार्थियों को सीटें आवंटित होगी। मीडिया प्रभारी डा. चंदन गुप्ता का कहना है कि विभागों ने अपने स्तर पर व्यवस्था कर ली है। जल्द ही परीक्षाएं करवाई जाएगी।

इंटरनल जनवरी में

2022-23 सत्र के लिए विश्वविद्यालय में 20 नवंबर से विद्यार्थियों की कक्षाएं लगना शुरू हो चुकी है। अधिकांश विभागों ने जनवरी में विद्यार्थियों के पहले इंटरनल करवाने का फैसला लिया है। यहां तक कुलपति ने सभी विभागाध्यक्षों को सिलेबस जल्द पूरा करने के निर्देश दिए है। अधिकांश विभागों में 90 दिनों में पाठ्यक्रम करवाया जाएगा। जनवरी अंतिम और फरवरी पहले सप्ताह में परीक्षा रखी जाएगी। रिजल्ट भी फरवरी अंतिम सप्ताह तक दिए जाएंगे। इसके तुरंत बाद अगले सेमेस्टर की कक्षाएं लगेंगी। ताकि जून तक दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा करवाकर सत्र को पटरी पर लगाया जा सके।

निजी विश्वविद्यालय को फायदा

सीयूईटी से भले ही विश्वविद्यालय जुड़ गया है, लेकिन फायदा शहर के निजी विश्वविद्यालय को अधिक हुआ है। प्रवेश प्रक्रिया मेें चार महीने देरी के चलते देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को मजबूरन निजी विश्वविद्यालय में जाना पड़ा है। यहां तक आटोनाम्स कालेजों में भी विद्यार्थियों को दाखिला लिया। मगर जब डीएवीवी में प्रवेश शुरू हुए तो कुछ विद्यार्थी यहां पढ़ाना चाहते थे। मगर इन शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को फीस नहीं लौटाई। इसके चलते विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों के लिए दिसंबर तक इंतजार करना पड़ रहा है। अधिकांश निजी विश्वविद्यालय ने सितंबर तक छात्र-छात्राओं को उनके पसंदीदा कोर्स में दाखिला दिया।

प्लेसमेंट पर असर

इन दिनों विश्वविद्यालय में जिन विद्यार्थियों को प्रवेश मिला है। उनकी सीयूईटी में पांच-सात हजार से ऊपर की रैंक है। एेसे में कई विभागों को अभी से चिंता सताने लगी है, क्योंकि पीजी में अगले साल इन छात्र-छात्राओं के लिए प्लेसमेंट के लिए कंपनी आएगी। विद्यार्थियों की रैंक अधिक होने से कंपनियां नौकरियां देने में कतराएंगी। इसके चलते विश्वविद्यालय का प्लेसमेंट प्रतिशत गिर सकता है।

Posted By: Sameer Deshpande

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