ईश्वर शर्मा, इंदौर (नईदुनिया)। राज्यों में चलती रहने वाली लड़ाइयों के बीच यह ऐसी सुखद खबर है, जो बताती है कि मानवता से बड़ा न कोई राज्य है, न कोई विवाद। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान कामकाज बंद होने से यूपी-बिहार लौट गए हजारों मजदूर इन दिनों जब काम पर लौट रहे हैं, तब वे मध्य प्रदेश को दुआ और धन्यवाद देना नहीं भूल रहे। वे कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश के लोगों का वो निश्छल प्यार हम जिंदगी भर नहीं भूलेंगे।

कहानी कुछ यूं है कि लॉकडाउन में जिंदगी का चक्का थमने पर हजारों प्रवासी मजदूर मुंबई से बदहवास पैदल ही निकल पड़े थे। भूखे-प्यासे, थके-हारे इन मजदूरों को तब मध्य प्रदेश, खासकर इंदौर के लोगों ने छांव, भोजन, पानी, शर्बत, दवाई, दुखते पांवों में मालिश के लिए मलहम से लेकर नंगे पांवों के लिए नए जूते-चप्पल तक दिए थे। उस सेवा से अभिभूत प्रवासी श्रमिक अब जब वापस अपने गांवों से निकलकर कामकाज के लिए मुंबई लौट रहे हैं तो इंदौर के बायपास पर रुककर मध्य प्रदेश की मिट्टी पर माथा टिकाकर प्रणाम कर रहे हैं और दुआ मांग रहे हैं कि इस राज्य के लोग हमेशा सुखी व समृद्ध रहें।

खुद खाने के पहले इंदौर को चढ़ाया कौर

यूपी के गोरखपुर जिले के पिपराइच निवासी सुभाषचंद्र पांडे अपने निजी ऑटो से मुंबई लौटते समय इंदौर के बायपास पर रुके और पत्नी उपमा पांडे के साथ सड़क किनारे बैठकर घर से लाया गया भोजन किया। पत्नी ने भोजन के पहले अपना पहला कौर इंदौर को चढ़ाया। वे दुआ देने के अंदाज में बोलीं- 'जिस इंदौर ने उस संकटकाल में हमारे भूखे-प्यासे बच्चों को खाना खिलाया, पानी और शर्बत पिलाया, दवाई दी... भगवान करें उस इंदौर के लोग कभी भूखे न रहें।' यह कहते हुए वे भावुक हो गईं।

हमारा 'सोनू सूद' तो इंदौर ही था

गांव बमयला तिवारीपुर, तहसील हंडिया, जिला प्रयागराज निवासी अंजनी कुमार तिवारी कहते हैं कि अभिनेता सोनू सूद द्वारा मदद शुरू करने के दो दिन पहले ही हम मुंबई से निकल गए थे। तब महाराष्ट्र पार करते-करते साथ लाया खाना खत्म हो गया था। एमपी में भूखे-प्यासे प्रवेश किया, लेकिन इंदौर ने भूखा नहीं रहने दिया। हमें भरपेट तो खिलाया ही था, रास्ते के लिए भी भोजन बांध दिया था। तब इंदौर ही हमारे लिए 'सोनू सूद' बन गया था।

लॉकडाउन में जब हम मुंबई से चले थे, तब सिर पर चिलचिलाती धूप थी और नीचे तपती धरती। न खाने को कुछ साथ था, न दवाई। बच्चे भी तब हमारे साथ ही थे। अगर उस भीषण संकट में मध्य प्रदेश और इंदौर के लोग हमारी मदद न करते, तो पता नहीं हम जिंदा भी रह पाते कि नहीं। - राजकुमार शुक्ला, ऑटो चालक, भयंदर ईस्ट, मुंबई

Posted By: Nai Dunia News Network

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