इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Vama Sahitya Manch Indore। मुंशी प्रेमचंद एक ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने जन जीवन शब्दों के जरिए पन्नों पर उतारा। इनके साहित्य सृजन में पात्र अक्सर समाज के साधारण वर्ग से आते थे और उस समाज का दर्पण दिखाते थे। उन्होंने किसानों, मजदूरों, स्त्रियों व दलितों की समस्याओं को पूरी संजीदगी से उभरा। यह बात शहर की साहित्यकारों ने वामा साहित्य मंच के माध्यम से व्यक्त की।

वामा साहित्य मंच द्वारा इंटरनेट मीडिया के माध्यम से वेबिनार आयोजित किया गया। 'मुंशी प्रेमचंद जयंती" और 'लोक साहित्य" इन दो विषयों पर महिला साहित्यकारों ने चर्चा की। सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर दिव्या मंडलोई ने आयोजन का आगाज किया। लोक साहित्य की विशेषज्ञ, पुस्तकें व शोध ग्रंथों की रचयिता डा. प्रभा पंत ने 'लोक साहित्य" विषय पर कहा कि लोक साहित्य वह साहित्य जो पीढ़ी दर पीढ़ी जनमानस में प्रवाहित होता रहता है। यह जन-जन के हृदय से जुड़ा होता है और वास्तव में जो जन-जन के हृदय के समीप हो। हमारी संस्कृति लोक साहित्य से समृध्द है। गांव में बसे आमजनों की परंपराएं, रीति-रिवाज, संवेदनाएं इस साहित्य में रची बसी होती हैं।

आयोजन में स्नेह श्रीवास्तव, रुपाली पाटनी, शारदा मंडलोई, शिरीन भावसार और आशा गर्ग ने मुंशी प्रेमचंद के सृजन पर प्रकाश डाला। लोक साहित्यकारों का व्यक्तित्व या कृतित्व विषय पर शांता पारेख ने महेंद्र भाणावत, डा. अंजना चक्रपाणि ने वीर रस के ख्यात कवि जगनिक की जानकारी देते हुए आल्हा खंड के कुछ अंश सुनाए। डा. शोभा प्रजापति ने जन कवि घाघ की कहावतें, नीलम तोलानी ने कवि भड्डरी की जीवनी बताते हुए मौसम के बारे में उनके द्वारा की गई भविष्यवाणियां उन्हीं की लोकोक्तियों के माध्यम से सुनाई। सरला मेहता ने संत सिंगाजी जिन्हें निमाड़ का कबीर भी कहा जाता है उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। आयोजन में अनिता जोशी, पुष्पा दसोंधी, भावना दामले, डा.वंदना मिश्र एवं विनीता शर्मा ने विभिन्न् लोक कथाएं सुनाई। अतिथि स्वागत संस्था अध्यक्ष अमर चडढ़ा ने किया।

Posted By: gajendra.nagar

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