Verdict in Bhaiyyu Maharaj suicide case: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शुजालपुर में किसान परिवार में जन्मे भय्यू महाराज का विवादों से नाता रहा है। बीएससी करने के बाद उन्होंने मांडलिंग में भी हाथ अजमाया। फिर संत बनकर लोगों को मार्गदर्शन देने लगे।सादगी से इतर हाइप्रोफाइल लाइफ स्टाइल उनकी पहचान थी। फिल्म उद्योग, राजनेताओं के साथ उद्योगपति भी उनके अनुयायी में शामिल थे।

इंदौर के बापट चौराहा पर उन्होंने 1996 में वर्तमान में स्थित सुर्योदय आश्रम के स्थान पर किराए से मकान लेकर लोगों की समस्या का निराकरण करने लगे। बाद में जब भक्तों की संख्या बड़ी तो इस जगह को खरीदकर इस स्थान पर आश्रम बनाया। सद् गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट की स्थापना कर विभिन्ना योजनाओं को संचालित करते थे।मध्यप्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र में भी उनके आश्रम थे।महाराष्ट्र के खाम गांव में भी पारदी बच्चों के लिए आश्रम बनाया।

शुरुआती दौर से साथ दुधाले

भैय्यू महाराज से संपर्क में विनायक दुधाले ट्रस्ट की स्थापना के समय आया। इससे पहले वह नगर निगम के मस्टर कर्मी के रूप में कार्यरत था। सूर्योदय आश्रम में अपनी सेवाएं देने लगे।उसकी सेवाओं से प्रभावित होकर महाराज ने उसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौपी और अपने साथ रखने लगे।इसके बाद उसने अपना नंदानगर स्थित निवास से निकलकर कबीटखेडी में रहने चला गया।अहमदनगर में उसके पास खेती जमीन थी।

पहली पत्नी की मौत के बाद आयुषी से आए संपर्क में

भैय्यू महाराज की पहली पत्नी माधवी देशमुखी की मृत्यु 2015 में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। इसके बाद उन्होंने 30 अप्रैल 2017 में आयुषी से शादी की।इस बीच लगातार दूसरी पत्नी और बेटी के बीच अनबन की खबरें आती रही है। भय्यू महाराज की मौत के बाद यह सिलसिला जारी रहा।ट्रस्ट के संचालन को लेकर भी सवाल उठे।

आश्रम के आयोजन में आती थी ख्यात हस्तियां

आश्रम के दत्त जयंती के मौके पर होने वाले सात दिवसीय आयोजन में ख्यात हस्तियां आती थी। आश्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल,शरद पवार, लता मंगेशकर, उद्धव ठाकरे, अनुराधा पौड़वाल, आशा भोंसले, फिल्म एक्टर मिलिंद गुणाजी के साथ कई राजनीतिक हस्तियां भी आई।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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