कपिल, नीले इंदौर। एक बार फिर वन विभाग लगातार कम हो रहे गिद्धों की गणना करने जा रहा है। तीन साल पहले इंदौर में जिस कचरे के ढेर यानी ट्रेंचिंग ग्राउंड के इर्द-गिर्द सबसे ज्यादा गिद्ध दिखाई दिए थे, अब वहां का नजारा काफी बदल चुका है। नगर निगम ने कचरे के पहाड़ों को खत्म कर जमीन को समतल बना दिया है। इसके चलते इलाके में गिद्धों का मंडराना कम हो गया है। इसके बावजूद वन विभाग इस बार भी इनकी गणना के लिए यहां तैनात रहेगा।

23 जनवरी 2016 को इनकी गणना हुई थी। उस दौरान विभाग को 284 गिद्ध मिले थे। इसमें अकेले देवगुराड़िया क्षेत्र के ट्रेंचिंग ग्राउंड में 246, पेडमी में 36 और महू में 2 शामिल थे। फिर एक बार इनकी गिनती हो रही है। 12 जनवरी को प्रदेशभर के 33 जिलों में एक साथ गिद्धों की गणना की जाएगी, जिसमें इंदौर वनमंडल भी शामिल है।

वन अफसरों की मानें तो पेडमी, पातालपानी और ट्रेंचिंग ग्राउंड के आसपास गिद्धों की गिनती होगी। इसके लिए 6-6 वन कर्मियों की टीम बनाई है, जो सुबह 6 से शाम 6 बजे तक आसमान में निगरानी करेंगे। अफसरों की मानें तो पूरे इलाकों की वीडियोग्राफी की जाएगी। एसडीओ एल. बर्मन ने बताया कि इंदौर वनमंडल में तीन स्थानों पर गिनती होगी। 12 घंटे तक गिद्धों की चिन्हित इलाकों में निगरानी रखी जाएगी। यह काम वनकर्मियों को दिया है।

छिंदवाड़ा में 94 स्थान चिन्हित

प्रदेशभर में 12 प्रजातियों के गिद्ध मिले हैं। सबसे ऊपर छिंदवाड़ा का नाम आता है। वहां विभाग ने 94 स्थानों को चिन्हित किया है। इसके बाद रायसेन में 80 और मंदसौर में 78 स्थानों पर गिद्धों की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। 33 जिलों में भोपाल, सीहोर, श्योपुर, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, इंदौर, ग्वालियर, मुरैना, दमोह समेत कई जिले शामिल हैं।

इसलिए आ रही कमी

-पशुओं को दर्द निवारक दवा डायक्लोफोनिक दी जाती है। पशु की मौत के बाद यदि गिद्ध इन्हें खाते हैं तो उनकी किडनी- लीवर खराब हो जाते हैं।

-खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक और पेस्टीसाइड को भी गिद्धों की असमय मौत का कारण माना गया है।

- कीटनाशकों के इस्तेमाल से गिद्धों की प्रजनन क्षमता भी कम हुई है, जबकि गिद्ध साल में एक बार सिर्फ दो अंडे ही देते हैं।

-बढ़ता प्रदूषण और घटते जंगल के कारण इनके प्राकृतिक आवास नष्ट हुए हैं।

6900 गिद्ध मिले

2016 में गणना के दौरान पूरे प्रदेश में 6900 गिद्ध मिले थे। 33 जिलों में 900 जगह चिन्हित हुई थी। इसके लिए वन विभाग ने वाइल्ड लाइफ संस्थानों और स्थानीय व्यक्तियों की मदद ली थी। इंदौर वन मंडल में आठ जगहों को चुना है, जहां गिद्ध आसानी से नजर आते हैं। इसमें पेडमी, पातालपानी, कजलीगढ़, देवगुराड़िया (ट्रेंचिंग ग्राउंड), आशापुर, रतवी (चोरल), बाडिया (महू), मानपुर आदि शामिल हैं। मगर गिद्धों की मौजूदगी सिर्फ तीन स्थानों पर मिली है।