इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर से बुरहानपुर जा रही बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में परिवहन आयुक्त मुकेश जैन शुक्रवार को इंदौर आए। उन्होंने घटना स्थल का दौरा किया और बस संचालकों के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई बस तेज गति से चलती मिली तो सीधे परमिट निरस्त किया जाएगा। कलेक्टर मनीष सिंह ने भी सहमति जताते हुए कहा कि आप आदेश निकालिए, मैं पालन करवा लूंगा। आयुक्त ने बस स्टैंड से चलने वाली बसों के बीच आधे घंटे का अंतराल करने के लिए भी कहा है।

रेसीडेंसी कोठी में बस संचालकों से चर्चा करते हुए जैन ने कहा कि हम लोग हर दिन आपकी जांच नहीं कर सकते हैं। आप लोगों को भी नैतिक जिम्मेदारी समझनी होगी। आपको ट्रेनिंग चाहिए तो मैं मुफ्त इंतजाम कर दूंगा, लेकिन इस तरह के हादसे स्वीकार नहीं हैं। मैं भोपाल जाकर पूरे प्रदेश के लिए कड़े निर्देश जारी करूंगा। इसका पालन भी सख्ती से होगा।

बैठक में बोले अधिकारी

परिवहन आयुक्त : हमने आपको परमिट-फिटनेस दे दिया, लेकिन बीच साल में गाड़ी की फिटनेस खराब हो गई तो आपकी जिम्मेदारी है। उसे ठीक करवाएं। पांच परिवार तबाह हो गए। आप लोगों को कचोटता नहीं है क्या। हम अपनी तरफ से नियम बना रहे हैं, लेकिन आपको भी साथ देना होगा।

कलेक्टर : आप लोेग कम अनुभवी चालक से गाड़ी चलवा रहे थे। आप सेवा करने नहीं बैठे हैं, शुद्ध व्यापार कर रहे हैं। गाड़ी में 50 लोग सवार थे। जिम्मेदारी से गाड़ी चलवानी चाहिए थी। गौरव सोनकर जेल चला जाएगा। उसकी बस के सारे परमिट निरस्त हो जाएंगे, लेकिन आप लोग समझिए। अभी मैं सख्ती करवाऊंगा तो दस लोगों से काल करवा देंगे। एक बार आयुक्त का आदेश आने दीजिए। मैं आपको लाइन पर ले आऊंगा।

बस संचालक : बसों की आवृत्ति कम कर दी गई है। एक बस के रुकने पर दूसरी बस आगे निकल जाती है। इससे मजबूरन पहले वाले को तेज गाड़ी चलानी पड़ती है। इंदौर में जारी परमिट पर उसी क्षमता की बस को बदलने की सुविधा नहीं दी जा रही है। इसे दिया जाना चाहिए। किसी परमिट पर आपत्ति आने पर आरटीओ उसे दरकिनार कर परमिट जारी कर देते हैं।

अपनी टीम को बचा गए आयुक्त - पत्रकारों से चर्चा में परिवहन आयुक्त जैन अपने विभाग को बचा गए। उनसे पूछा गया कि इस मामले में क्या परिवहन विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है। उड़नदस्ता प्रभारी छह माह से सेंधवा बैरियर से इंदौर ही नहीं आए हैं। 16 जून से बस चार जिलों से चल रही थी। इसमें किसका दोष है। तो आयुक्त केवल जांच करने और उसके बाद दोषी पर कार्रवाई करने की बात कह पाए।

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