इंदौर। नामी फ‍िल्‍म अभिनेता अक्षय कुमार अपनी फ‍िल्‍म के प्रमोशन के लिए शहर पहुंचे। उन्‍होंने मीडिया से बात की और कुछ पल फुर्सत के निकालकर खाऊ चौपाटी 56 दुकान भी पहुंच गए। जब अक्षय कुमार 56 दुकान पर पहुंचे तो उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्‍या में प्रशंसक वहां मौजूद थे। वहां भारी भीड़ देखकर अक्षय कुमार कार से नीचे नहीं उतरे और कार से ही अपने प्रशंसकों का अभिवादन किया। अक्षय अपने साथ इंदौर का नमकीन भी ले गए।

जैसे ही अक्षय कुमार के 56 दुकान आने की खबर फैली वहां बड़ी संख्‍या में सिने प्रेमी जमा हो गए थे। भारी भीड़ देखकर अक्षय ने कार से उतरना उचित नहीं समझा और मुस्‍कराकर तथा हाथ ह‍िलाकर गाड़ी से ही सबका अभिवादन किया।

अक्षय कुमार ने मीडिया से बातचीत के दौरान सेहतमंद रहने के गुर भी बताए। उन्‍होंने मीडिया से अपनी फ‍िल्‍म रक्षाबंधन के बारे में किए गए सवालों के जवाब भी दिए। इस फ‍िल्‍म में अभिनेत्री भूमि पेडनेकर हैं।

सात जन्म लूं तब भी संवेदनाओं के सभी जोनर नहीं कर पाऊंगा

मीडिया से अक्षय ने कहा कि संवेदनाओं का कभी अंत नहीं होता। संवेदनाओं के इतने जोनर हैं कि यदि मैं सभी जोनर पर कार्य करूं तो शायद सात जनम लेने पड़ेंगे। मैं कभी अलग जोनर पर जाने की इच्छा नहीं रखता बस कोशिश यही करता हूं कि किसी एक तरह के भाव या किरदार की छवि न बने। जहां तक बात अन्य फिल्मों से मेरी फिल्म की स्पर्धा की है तो मैं तो यही चाहता हूं कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सभी फिल्में हिट हों।

उन्‍होंने कहा कि मैं किसी दूसरे से अपनी कोई स्पर्धा नहीं मानता। मैं घोड़ा नहीं हूूं जो दूसरे से रेस लगाऊं। हर फिल्म चलना चाहिए। अक्षय कुमार अपनी आगामी फिल्म रक्षाबंधन के प्रचार के लिए इंदौर आए थे। उनके साथ फिल्म के निर्देशक आनंद एल राय और फिल्म में अक्षय की बहन की भूमिका निभा रही सादिया खतीब, दीपिका खन्ना, स्मृति श्रीकांत और सहजमीन कौर भी थी।

शहर आगमन पर यह टीम पहले डेली कालेज पहुंच वहां के विद्यार्थियों से रूबरू हुई और उसके बाद वेलोसिटी मिराज सिनेमा में मीडिया और प्रशंसकों से रूबरू हुई।

तय वक्त से करीब दो घंटे देरी से आए अक्षय कुमार ने मीडिया से बमुशि्कल 20 मिनट ही चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह फिल्म का चलना कहानी पर निर्भर करता है बजट पर नहीं। दर्शक उस कहानी को ही स्वीकारते हैं जिसका कंटेंट अच्छा। फिल्म का चलना इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसने आपके दिल को कितना छुआ। आज भी हमारे देश में दहेज प्रथा है। कोई इसे दहेज कहता है तो कोई भेंट। यदि इस फिल्म से 5 प्रतिशत लोगों की सोच भी बदली तो प्रयास सफल रहेगा।

लेखक आनंद एल राय ने फिल्म के बारे में कहा कि अब वह वक्त आ गया है जब पारिवारिक मूल्यों पर केंद्रित फिल्मों का निर्माण किया जाए। विगत 10-15 वर्षों में इंसान कुछ ज्यादा ही स्मार्ट बन गया जितना भगवान ने उसे नहीं बनाया था। हमें यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि जितना जरूरी हमारे लिए दूसरी बातें हैं उतना ही परिवार भी है और परिवार के साथ अधिक से अधिक वक्त बिताना चाहिए।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close