इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। दो दिन पहले हुई बारिश से शहर के नागरिक तो परेशान हुए ही प्रदेश के सबसे बड़े और पुराने औद्योगिक क्षेत्र में भी समस्याओं का अंबार नजर आने लगा है। पीथमपुर औद्योगिक संगठन ने औद्योगिक क्षेत्र में जलजमाव और नुकसान की शिकायत की है। बारिश के बाद पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में न केवल रास्तों पर बल्कि कारखानों के भीतर भी पानी घुस गया। औद्योगिक संगठन ने आरोप लगाया है कि इंदौर की अनदेखी और एमपीआइडीसी के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र को किए जाने का दुष्परिणाम उद्योग जगत को भुगतना पड़ रहा है।

पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डा. गौतम कोठारी के अनुसार पांच जुलाई की बारिश के बाद पूरे औद्योगिक क्षेत्र की सड़के बंद हो गई थी। रास्तों पर तो जल जमाव हुआ ही तमाम फैक्ट्रियों के अंदर भी पानी घुस गया। कई फैक्ट्रियों में मशीनों और सामग्री में पानी लगने के कारण लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। औद्योगिक संगठन ने आरोप लगाया कि इंदौर के एकेवीएन को मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन में विलय करने का नतीजा अब उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में मेंटेनेंस के काम नहीं हो रहे हैं। ड्रेनेज लाइन की व्यवस्था नहीं हो सकी है। अब सड़कों का सुधार, रोशनी की व्यवस्था जैसे काम भी अटक रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले एकेवीएन इंदौर ही इस औद्योगिक क्षेत्र की व्यवस्थाएं संभालता था। चार साल पहले एकेवीएन का विलय एमपीआइडीसी में कर दिया गया। साथ ही एमपीआइडीसी का मुख्यालय भोपाल कर दिया गया। औद्योगिक संगठन मांग कर रहे थे कि एमपीआइडीसी का मुख्यालय इंदौर रखा जाना चाहिए। हालांकि सरकार ने बात नहीं मानी। डा. कोठारी के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र में ड्रेनेज लाइन बिछाने की मांग लंबे समय से लंबित है। पहले मांगों पर निर्णय इंदौर से ही हो जाते थे। अब एमपीडीआइसी भोपाल में फाइल मंजूर होने का इंतजार करना पड़ रहा है।

इधर एमपीआइडीसी के कार्यकारी निदेशक रोहन सक्सेना का कहना है कि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में ड्रेनेज लाइन बिछाने के लिए 90 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव मंजूरी के लिए भोपाल भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

Posted By: Sameer Deshpande

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