इंदौर। मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले बेटे के माता-पिता होना हमारे लिए बहुत गौरव की बात है। हमें अपनी किस्मत पर नाज है कि ईश्वर ने हमें ऐसे आदर्श, जांबाज और सच्चे देशभक्त सपूत का माता-पिता बनाया।

ये शब्द हैं शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के माता-पिता के। वे 15 अगस्त को अपना समूह के तिरंगा अभियान के झंडावंदन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। अपने साहस और बलिदान से देश की आन-बान-शान को सुरक्षित वाले शहीद कैप्टन बत्रा के पिता गिरधर बत्रा और मां कमल बत्रा ने बताया कि 24 साल के जवान बेटे को खोना असहनीय तकलीफ देने वाला क्षण था लेकिन उससे कई गुना ज्यादा बेटे की शहादत पर गर्व होता है।

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में रहने वाले पिता गिरधर बत्रा बताते हैं कि बेटे विक्रम में बचपन से ही देशभक्ति की भावना नजर आती थी। वह कहानियां भी देशभक्ति से जुड़ी ही पढ़ता था। सभी की मदद करना, सामाजिक कार्य, बड़ों की इज्जत करना, छोटों को प्यार करना उसकी आदत थी।

1999 में कारगिल के पॉइंट 5140, पॉइंट 4750,पॉइंट 4875 को दुश्मनों से छुड़वाया था। कैप्टन बत्रा पॉइंट 4875 पर साथी कैप्टन नवीन को बचाने में जख्मी हो गए थे। 7 जुलाई को उनके शहीद होने की खबर आई थी लेकिन शहीद होने के पहले उन्होंने 5 दुश्मनों को मार गिराया था।

इसी वजह से तीन पॉइंट बत्रा टॉप के नाम से पहचाने जाते हैं। पिता बेहद गर्व से बताते हैं कि उनकी जांबाजी के कारण सेना में उन्हें 'शेरशाह" पुकारते थे। उन्होंने अपने सीनियर अफसर को शहीद होने के पहले कहा था कि 'ये दिल मांगे मोर"। उनके इसी साहस के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

ऐसे बेटे को जन्म देकर कोख धन्य हो गई

मां कमल बत्रा कहती हैं कि ऐसे सपूत को जन्म देकर मेरी कोख धन्य हो गई। जवान बेटे के नहीं रहने की खबर सुनकर दिल कांप उठा था लेकिन कुछ ही दिनों में हमने खुद को संभाल लिया। उसकी शहादत को याद कर अब नाज होता है। हर मां को देश के ऐसे सपूत की मां बनने का मौका मिलना चाहिए।