इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना (एबीपीएम-जय) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की प्रगति का मूल्यांकन के लिए इंदौर में 9 व 10 दिसंबर को समीक्षा बैठक आ आयोजन किया गया। इसमें मप्र सहित अन्य राज्यों के प्रतिभागी भी शामिल हुए।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा.आर.एस. शर्मा ने आयोजन में बताया कि हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में एबीडीएम की सेवाएं जैसी योजनाएं काफी उपयोगी साबित हुई है। इनकी मदद से देश के हर कोने में विशेषज्ञ डाक्टर से दूरस्थ गांव में बैठे मरीज भी परामर्श ले सकते है। इस व्यवस्था से मरीजों को जहां गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं नि:शुल्क मिलती है। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ उपयुक्त स्वास्थ्य कर्मियों की पहचान, जांच व दवाओं की डिलीवरी भी हो पा रही है।

डा. शर्मा ने बताया कि इंदौर में हुई दो दिवसीय बैठक में हम इस योजना को आगे बढ़ाने के तरीकों पर समीक्षा कर रहे हैं। कार्यक्रम में एनएचए के एडिशनल सीईओ और एबीडीएम के एमडी डा. प्रवीण गेदाम ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की अवधारणा और विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसकी मदद से मरीज को रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेजों और जानकारी को बार-बार साझा करने से राहत मिलेगी।

इसकी मदद से सरकारी एवं निजी क्षेत्र में भी सहभागी संस्थाओं और पेशेवरों के मध्य सुगम संवाद स्थापित हो सकेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में आ रही बाधाओं का तत्काल निराकरण होगा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के डिप्टी डायरेक्टर रोहित देव झा ने पीएम-जय के अंतर्गत पोर्टिबिलिटी फीचर के बारे में बताया। इसके अंतर्गत हमारे लाभार्थी देश के किसी भी आयुष्मान सूचीबद्ध अस्पताल में अपना मुफ्त उपचार करवा सकते हैं। देश में अभी तक 3.6 लाख लाभार्थियों ने पोर्टिबिलिटी फीचर के अंतर्गत उपचार प्राप्त किया है, जिस पर 602.3 करोड़ रुपये प्राधिकृत किए गए है।

Posted By: Sameer Deshpande

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