अश्विन बक्शी, इंदौर। एक मां के लिए सबसे ज्यादा खुशी का पल वह होता है जब वह अपने बच्चे को इस दुनिया में लाती है। इसके आगे वह अपने सारे दर्द कुर्बान कर देती है। लेकिन, 19 वर्षीय सविता का दर्द इससे कहीं ज्यादा था। एक ओर हड्डियों के घातक कैंसर ने उसके एक पैर का आकार चार गुना कर दिया था, दूसरी ओर कोख में पल रहे बच्चे को बचाने की जद्दोजहद से गुजर रही थी। ऐसे में एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने उसकी राह आसान की। वे मौत को तो नहीं टाल सके, लेकिन जाने से पहले उसके हाथों में नन्हीं सी जान सौंप दी। 37 दिन बेटी को दुलारने को बाद 14 जनवरी को उसने अंतिम सांस ली।

इंदौर निवासी सविता तंवर को पेट में गठान थी। 17 दिसंबर 2018 को उसे अरबिंदो अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां पता चला कि उसे स्पिंडल सेल सरकोमा नामक घातक कैंसर है, जो बहुत कम लोगों में होता है। यह उसके पैरों की हड्डियों में फैलने लगा था। धीरे-धीरे उसका पैर सामान्य से चार गुना आकार का हो गया। पति ने इलाज कराया। ऑपरेशन के तीन माह बाद फिर से गठान उभरी। मायके वाले एमवाय अस्पताल लाए। पेट में दर्द होने पर सोनोग्राफी कराई तो पता चला महिला को 15 सप्ताह का गर्भ है। ट्यूमर के कारण महिला का एक पैर मोटा हो रहा था।

ट्यूमर बोर्ड बना और बगैर कीमो के इलाज शुरू हुआ

महिला के इलाज को लेकर दो स्थिति थीं। कीमोथैरेपी न दें तो महिला की जान नहीं बचाई जा सकती और दें तो कोख में पल रही जान को खतरा। जांच रिपोर्ट में कीमो देना अनिवार्य था। आखिर ट्यूमर बोर्ड बनाया गया। इसमें शिशु रोग विशेषज्ञ नीलेश जैन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित्रा यादव, कैंसर विशेषज्ञ डॉ. प्रीति जैन व डॉ. सुधीर कटारिया, हिस्टो पैथोलॉजी विभाग से डॉ. शिखा घनघोरिया व अन्य डॉक्टर शामिल थे। सभी के निर्णय अनुसार बगैर कीमोथैरेपी के इलाज शुरू हुआ।

पांच माह का गर्भ था तब आई थी

सविता को पांच माह के गर्भ के साथ लाया गया था। ससुराल व मायके वालों से बात की। वे सभी बच्चा चाहते थे। बच्चे को सुरक्षित रखकर कैंसर का इजाज शुरू किया गया। - डॉ. रमेश आर्य, अधीक्षक शासकीय कैंसर अस्पताल

कैंसर की अंतिम अवस्था में थी

वह कैंसर की अंतिम अवस्था में थी। उसकी सफल प्रसूति कराना चुनौती थी। - डॉ. सुधीर कटारिया, पलियेटिव केयर इंचार्ज, शासकीय कैंसर अस्पताल

स्पिंडल सेल सरकोमा

यह एक घातक कैंसर ट्यूमर होता है जो हड्डी या नरम ऊतक में विकसित होता है। इसके हाथ या पैर में फैलने की आशंका सबसे अधिक है। इस तरह के केस अधिकांशतः 40 साल से अधिक उम्र के मरीजों में देखे गए हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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