World AIDS Day: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। यह भ्रांति है कि हर एचआइवी पाजीटिव एड्स पीड़ित होता है। एचआइवी पाजीटिव होने के बाद भी व्यक्ति को एड्स की चपेट में आने में आठ से दस वर्ष लगते हैं। पूरा इलाज और समय पर दवाइयां ली जाएं तो यह समय बढ़ भी सकता है। जागरूकता के चलते इंदौर जिले में एक वर्ष के दौरान मिलने वाले एचआइवी पाजीटिव की संख्या में लगातार कमी आ रही है। 2012 में जिले में 901 एचआइवी पाजीटिव मिले थे, जबकि इस वर्ष अब तक सिर्फ 492 मरीज मिले हैं।

1 दिसंबर को हर वर्ष एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य एड्स को लेकर जागरूकता लाना है। वर्तमान में इंदौर जिले में करीब पांच हजार एड्स पीड़ित हैं। डाक्टरों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का वजन अचानक तेजी से कम होने लगे या उसे लंबे समय तक बुखार बना रहे तो उसे एचआइवी जांच करवा लेनr चाहिए। एमजीएम मेडिकल कालेज में निश्शुल्क जांच की व्यवस्था है। जिनकी जांच रिपोर्ट पाजीटिव आती है उन्हें एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र भेजा जाता है। दोबारा जांच में भी रिपोर्ट पाजीटिव आती है तो ऐसे लोगों को एमवायएच स्थित एआरटी केंद्र भेजा जाता है। यहां ऐसे लोगों को नियमित जांच और निश्शुल्क दवाइयां दी जाती हैं।

कम हो जाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता - एमवायएच स्थित एआरटी केंद्र के नोडल अधिकारी डा.अशोक ठाकुर के अनुसार, एचआइवी पाजीटिव व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य व्यक्ति के मुकाबले कम हो जाती है। यही वजह है कि इन लोगों के किसी संक्रमण की चपेट में आने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। अगर ऐसे व्यक्ति नियमित रूप से दवाइयां ले तो पूरा जीवन आसानी से गुजार सकते हैं।

एचआइवी पाजीटिव महिला दे सकती स्वस्थ बच्चे को जन्म - एक एचआइवी पाजीटिव महिला भी स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। एमवायएच अस्पताल में अब तक ऐसे 600 से ज्यादा बच्चों का जन्म हो चुका है जिनकी मां तो एचआइवी पाजीटिव थीं लेकिन बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. सुमित्रा यादव के अनुसार, अगर एचआइवी पाजीटिव महिला समय पर दवाइयां ले, नियमित जांच कराए, अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर रखे और संक्रमण न हो, इस बात का ध्यान रखे तो वह स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है।

Posted By: Hemraj Yadav

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