इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। विश्व सिविल एविएशन डे आज पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। विश्व में उड्डयन सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भले ही 1996 से हर सात दिसंबर से मनाया जा रहा है, लेकिन इंदौर के लिए यह तारीख खास है। दरअसल 84 साल पहले आज ही के दिन सात दिसंबर को इंदौर की जमीन ने पहली बार इस हवाई जहाज को देखा था। उस समय शहर के लोग इसे चील गाड़ी बोलते थे और इसे देखने के लिए सुबह शाम एयरपोर्ट पर पहुंच जाते थे। आज इंदौर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है। 2030 तक यह देश के सबसे व्यस्ततम एयरपोर्ट में भी शामिल हो सकता है।

एयरपोर्ट पर दर्ज जानकारी के अनुसार इंदौर एयरपोर्ट का निर्माण कार्य 1935 में निर्माण शुरू करवाया गया था। करीब दो साल में यह बनकर तैयार हुआ था, जिसमें इसे बनाने में 1.84 लाख रुपये का खर्च आया था। इसके बाद 7 दिसंबर 1937 को जेआरडी टाटा इंदौर में विमान लेकर आए थे। उनके इस विमान में चिट्ठियां होती थीं। जब 10 हजार करोड़ रुपये के कारोबार समूह के प्रमुख जेआरडी टाटा हवाई जहाज से चिट्ठियां लेकर इंदौर आते थे तो हवाई जहाज को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती थी। उसी साल (1937) टाटा एयरलाइंस ने बंबई (मुंबई), इंदौर-भोपाल-ग्वालियर-दिल्ली के बीच उड़ान शुरू की थी। 26 जुलाई 1948 को इंदौर एयरपोर्ट देश के हवाई नक्शे पर उभरा था, लेकिन हवाई सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई थीं। एक अप्रैल 1950 से केंद्रीय वित्तीय एकीकरण योजना के अधीन इंदौर एयरपोर्ट को भारत सरकार को सौंप दिया गया था।

रोज तीन विमान से 100 का सफर

जानकारी के अनुसार 14 नवंबर 1981 वह पहला दिन था जब इंदौर में एक साथ तीन बोइंग आना शुरू हुए थे। इंडियन एयरलाइंस के इस विमान में तत्कालीन सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रकाशचंद्र सेठी दिल्ली से आए थे। उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई थी। इसके बाद 2019 में इंदौर में उड़ानों की संख्या 100 प्रतिदिन तक भी पहुंच गई थी। हालांकि अभी 64 से 68 विमान राेजाना इंदौर आते है। वहीं अगर इसमें निजी, सेना और फ्लाइंग क्लब के विमान को जोड़ ले तो यह आंकड़ा आज भी 80 तक पहुंच जाता है। वहीं इंदौर प्रदेश का पहला 24 घंटे खुला रहने वाला और विदेशी उड़ान संचालित करने वाला एयरपोर्ट हैं।

क्यों किया इंदौर ने विकास

एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन को बनाने वाली टीम में शामिल रहे वर्तमान एयरपोर्ट डायरेक्टर प्रबोध शर्मा बताते है कि पहले हम पुराने टर्मिनल से ही संचालन करते थे लेकिन यह भविष्य को देखते हुए छोटा लगने लगा था। जब हम इस दो मंजिला टर्मिनल के लिए प्रयास कर रहे थे। उस समय यह सोचा नहीं था कि कुछ साल बाद ही यह भी छोटा पड़ने लगेगा।

कोरोना काल के पहले यह छोटा लगने भी लगा था। अब हमारे भविष्य के विस्तार में नया टर्मिनल भवन भी शामिल है। शर्मा बताते है इंदौर की भगोलिक स्थिति,आसपास के शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण इंदौर एयरपोर्ट ने इतना विकास किया है। अगले कुछ साल में यह और बेहतर हो जाएगा। अगले कुछ साल में यहां से हर दिन 200 से ज्यादा उडाने संचालित होगी।

हम 2030 को देख रहे है

ट्रेवल एजेंट एसाेसिएशन आफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जादौन के अनुसार इंदौर में विकास की काफी संभावनाएं है, लेकिन हम इंदौर एयरपोर्ट को को 2030 के हिसाब से देख रहे है। उस समय यह देश के सबसे व्यस्ततम एयरपोर्ट की लिस्ट में शामिल होगा। आज बड़े एयरपोर्ट पर विमानों की नाइट पार्किंग खत्म हो चुकी है। जब यह इंदौर में उपलब्ध होगी, तो एयरलाइंस यहां आएगी, जिससे उड़ानें बढ़ेगी। विदेशों के लिए यह नया गेटवे बनकर उभरेगा। घरेलू यात्री यहां पर आएंगे और विदेश के लिए उड़ान लेंगे। निजी हाथों में जाने से भी काफी फर्क पड़ जाएगा।

Posted By: Sameer Deshpande

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