World Mental Health Day 2021: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोविड को मात दे चुका हर पांचवा मरीज अवसाद, अनिंद्रा व एंजायटी से परेशान है। महामारी के बाद शहर में मनोरोगियों की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। चिकित्सकों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों की ओपीडी और क्लीनिकों पर ऐसे मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मनोरोगियों में पहले बुजुर्गों की संख्या अधिक थी लेकिन अब युवा भी इस बीमारी से पीड़‍ित हो रहे हैं। अक्सर युवा अपनी परेशानियां दूसरों से साझा नहीं कर पाते इस वजह से जल्दी अवसाद का शिकार हो जाते हैं। एकल परिवार में रहने वाले दंपती में विवाद ज्यादा होते हैं। इसके चलते उनके अवसाद से पीड़‍ित होने की आशंका ज्यादा होती है।

मरीजों में दिख रहे ऐसे लक्षण

- घबराहट, बैचेनी व उदास होना

- काम करने की इच्छा कम होना

- जल्द थकान होना

- दिल की धड़कन व सांस तेज हो जाना

- मुंह सूखना

- सिर में भारीपन होना

- नींद में कमी होना

- नकारात्मक व खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आना

बचाव के लिए

- चिकित्सक से मिलकर काउंसलिंग ले अपनी परेशानी बताएं।

- प्रतिदिन व्यायाम, प्राणायाम व योगा करें।

- दिनचर्या नियमित रखें।

-पर्याप्त नींद लें।

- मादक पदार्थ का सेवन न करें।

सड़क पर घूमने वाले मनोरोगियों का किया जाएगा उपचार

एमजीएम मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग के एचओडी डा. वीएस पाल के मुताबिक कई गंभीर मानसिक रोगी शहर की सड़कों पर घूमते रहते हैं और उनकी पहचान व उपचार भी नहीं हो पाता है। ऐसे में पेन इंडिया अवेयरनेस एंव आउटरीच प्रोग्राम के तहत विधिक सेवा प्राधिकरण इंदौर व मानसिक चिकित्सालय द्वारा 10 अक्टूबर को चिकित्सालय परिसर में मानसिक रूप से अशक्त व्यक्तियों के स्वास्थ्य परीक्षण व उपचार के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर में निगम के जोनल कार्यालयों के तहत अलग-अलग टीमों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वो सड़क में घूमने वाले ऐसे मनोरोगियों को उपचार व स्वास्थ्य परीक्षण के लिए इस शिविर में लेकर आए।

काम छूटने, आर्थिक नुकसान के कारण बढ़ा तनाव

एमजीएम मेडिकल कालेज के एसोसिएट प्रोफेसर डा. उज्जवल सरदेसाई के मुताबिक कोविड के बाद अवसाद वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। किसी का काम छूट गया है। तो किसी के घर पर तनाव हुआ। कोविड में स्वजनों की मौत के कारण कई लोग तनाव के कारण अवसाद में रहे। कुछ लोगों को कोविड बीमारी होने का डर या यह घबराहट भी हुई बीमारी ठीक नहीं हुई है। यही वजह है कि कोविड के बाद लोगों में चिड़चिड़ापन भी बढ़ा है।

मानसिक चिकित्सालय : 1917 में बना

कुल बेड उपलब्ध : 155

भर्ती मरीज : 109

ओपीडी : हर दिन 200 मरीज उपचार के लिए आते है। प्रदेश के अन्य जिलों के अलावा राजस्थान, गुजरात व महाराष्ट्र से मरीज आते है।

डे केयर सेंटर में सुविधा : मानसिक चिकित्सालय परिसर में बने डे केयर सेंटर में मानसिक व मंदबुद्धि मरीजों को रबर सील बनाना, गुड़िया बनाना, कढ़ाई बुनाई व लेदर के खिलौने बनाना सिखया जाता है। इसके अलावा इन्हें राखी व दिए बनाना भी सिखाया जाता है। इससे इनका समय व्यतीत होता है और कुछ नया सीखने से मरीजों में आत्मविश्वास बढ़ता है। मानसिक चिकित्सालय में इलेक्ट्रो कन्वलसिव थैरेपी (ईसीटी) के माध्यम से इलाज किया जाता है। इसके अलावा साइको थैरेपी व काउंसलिंग भी दी जाती है।

मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग द्वारा दी जाएगी सुविधा

बुजुर्गो के लिए : मानसिक हेल्थ क्लनिक शुरू किया जाएगा

नशे की लत छुड़वाने के लिए : वर्तमान में डी एडिक्शन सेंटर संचालित हो रहा है। यहां पर 19 मरीज भर्ती है।

बच्चों के लिए : चाइल्ड साइक्रेटरी क्लिनिक शुरु किया जाएगा। इसमें बच्चों के व्यवाहर, पेरेंटिंग, पढ़ाई में मन न लगना व नशे के संबंध में काउंसलिंग की जाएगी।

यौन रोगियों के लिए : कोविड के कारण एमवायएच में दो साल से बंद यौन रोग क्लिनिक को शुरू किया जाएगा।

75 विशेषज्ञ प्रतिवर्ष तैयार होंगे

मानसिक चिकित्सालय में 33 करोड़ रुपये की योजना से विकास कार्य किए जाना है। इसके तहत मनोरोग में सुपर स्पेशलिटी की व्यवस्था शुरू होगी। यहां पर क्लिनिकल साइकोलाजी व पीएचडी कोर्स, साइकेट्रिक, सोशल वर्कर के लिए एमएससी साईकेट्रिक कोर्स शुरु किया जाएगा। इस तरह यहां पर 75 छात्र प्रतिवर्ष तैयार होंगे। इसके लिए मानसिक चिकित्सालय परिसर में इमारत का निर्माण होगा और छात्रों के पढ़ाने के लिए 25 शिक्षकों की नियुक्ति भी होगी।

Posted By: Prashant Pandey

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