इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सात दिनी ब्रह्मोत्सव व रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत लक्ष्मी-वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग में शनिवार से होगी। इससे पहले शुक्रवार को उत्सव में कोई विघ्न न आए इसलिए विश्वकसेन भगवान का पूजन किया गया। पूजन दक्षिण भारतीय पद्धति से दक्षिण भारत से आए भट्टर स्वामी द्वारा करवाया गया। इसके पहले पूर्व आचार्यों से उत्सव करने की आज्ञा ली गई। इस अवसर पर वेंकटेश महिला मंडल द्वारा संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया गया।

देवस्थान के पुजारी व भक्तों द्वारा स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज का चरण पूजन किया गया। उन्होंने बताया कि पहले दिन सुबह 9 बजे ध्वजारोहण होगा। इसके बाद 9.30 बजे शेषावतार रामानुज स्वामी का महाभिषेक और संतों के प्रवचन 11.30 बजे होंगे। सांध्यकालीन सत्र में रामानुज स्वामी की शोभायात्रा रात 8.30 बजे निकाली जाएगी। इसमें गायक भजनों की प्रस्तुति देंगे और संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थी वेंकट रमणा गोविंदा के जयघोष लगाते चलेंगे। पूजन में पुखराज सोनी, केदार जाखेटिया, राजेंद्र सोनी और नितिन खटोड़ मौजूद थे।

रथयात्रा का न्योता देने के लिए निकलेगी प्रभातफेरी

इंदौर। अंतरराष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (इस्कान) द्वारा 1 जुलाई को निकलने वाली जगन्नाथ रथयात्रा का न्योता आम लोगों को देने के लिए 26 जून को सुबह 6 बजे मेघदूत उपवन से प्रभातफेरी निकाली जाएगी। इसमें भगवान जगन्नाथ के विग्रह का लघु स्वरूप सुसज्जित रथ पर विराजित किया जाएगा। इस्कान इंदौर की भजन मंडली के सदस्य भजन गाएंगे। प्रभातफेरी स्कीम 54, 74, 78 आदि क्षेत्रों में भ्रमण करेगी। अध्यक्ष स्वामी महामनदास और रथयात्रा प्रभारी हरि अग्रवाल ने बताया कि रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार यात्रा 1 जुलाई को परदेशीपुरा स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर शिवधाम से शुरू होगी।

मंदिर का स्थापना दिवस मनाया, लक्ष्मीनारायण यज्ञ में दी आहुतियां

इंदौर। एरोड्रम रोड स्थित श्रीविद्याधाम परिसर के शालिग्राम मंदिर का सातवां स्थापना दिवस आषाढ़ की योगिनी एकादशी पर शुक्रवार को मनाया गया। महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सान्निध्य में सात किस्मों के फूलों से भगवान शालिग्राम का अभिषेक किया गया। लक्ष्मीनारायण यज्ञ में आहुति देकर बटुकों ने पूजन किया। मंदिर की स्थापना 2015 में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुई थी। इस बार इस एकादशी पर कई शुभ संयोग भी रहे। अश्विनी और भरणी नक्षत्र के अलावा सुकर्मा, धृति के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी रहा। भगवती उपासना मंडल की बहनों ने सुबह व दोपहर में भजनों की प्रस्तुतियां दी। मंदिर में कई महिलाओं ने एकादशी व्रत का उद्यापन भी किया।

Posted By: Hemraj Yadav

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