इंदौर। 'ताई और भाई की रट को छोड़कर उद्योगपति यदि अपने उद्यम पर ध्यान दें तो प्रदेश में उद्योगों का विकास अधिक तेजी से होगा। औद्योगिक संगठन राजनीति में ही उलझा रहता है जिससे वह उचित समस्या को सही समय पर उठा ही नहीं पाता। कई बार तो मुद्दों को समझे बगैर ही हो-हल्ला करने लगते हैं।'

ये बात प्रदेश की उद्योग मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोमवार को औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों से कही। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीआईसी) के औद्योगिक क्षेत्रों का विलय एकेवीएन (औद्योगिक केंद्र विकास निगम) में करने के मुद्दे का विरोध करने गए औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मंत्री से कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के छोटे उद्योग बर्बाद हो जाऐंगे।

इसके विरोध में भाजपा के ही कई बड़े नेता हमारे समर्थन में हैं। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मप्र के अध्यक्ष हेमंत मेहतानी ने उद्योग मंत्री से कहा- हमारे संगठन को हाल ही में ताई ने सम्मानित किया है। पूर्व उद्योग मंत्री का समर्थन भी है। इस पर मंत्री ने कहा- पहले तो आप नेताओं का नाम लेना बंद करें। आपके साथ समस्या ये है कि आप बजाय उद्योग पर ध्यान देने के राजनीति में अधिक ध्यान देते हैं।

विलय के मुद्दे पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। औद्योगिक संगठनों को इसमें आपत्ति है तो हमें प्रतिवेदन दें। आपकी सहमति के बाद ही शासन निर्णय लेगा। चर्चा के दौरान पीथमपुर औद्योगिक संगठन, जीआईएसटी, लघु उद्योग संगठन, सांवेर रोड, पोलोग्राउंड आदि औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सुझाव दें, हम करेंगे बदलाव

शाम 4 बजे रेसीडेंसी कोठी पर उद्योग आयुक्त वीएल कांताराव ने उद्योगपतियों से मुलाकात कर समस्याएं जानी। इस दौरान 40 से ज्यादा उद्योगपति उपस्थित थे। श्री कांताराव ने कहा कि समिट को ध्यान रखकर प्रदेश की नई उद्योग नीति तैयार की जा रही है। इसमें औद्योगिक संगठनों की मांगों को शामिल किया गया है। एक-दो दिन में प्रारूप ऑनलाइन किया जाएगा। किसी को परेशानी या समस्या हो तो वह विभाग को सुझाव दे सकता है। उद्योग आयुक्त के सामने भी उद्योगपतियों ने डीआईसी-एकेवीएन विलय का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। उद्योग मित्र योजना 2004 को भी प्रदेश में पुनः लागू करने की मांग की गई।

बहुमंजिला को मिले अनुमति

उद्यमियों को आवंटित जमीन पर प्लांट की स्थापना के बाद खाली जमीन पर मल्टीस्टोरी औद्योगिक भवनों के निर्माण की अनुमति प्रदान की जाना चाहिए। उद्योगपति योगेश मेहता ने उद्योग आयुक्त से कहा कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में वर्टीकल इंडस्ट्रीयल एरिया डेवलपमेंट की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

उद्योगपतियों का कहना था कि सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र, पोलोग्राउंड औद्योगिक क्षेत्र, पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के साथ ही प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों को विस्तार के लिए जमीन समाप्त हो चुकी है। यदि सरकार इन क्षेत्रों में मल्टीस्टोरी औद्योगिक भवनों की योजना लागू करती है तो यहां रेडीमेड, फार्मासुटिकल, पैकेजिंग, प्लास्टिक मोल्डिंग व इंजीनियरिंग जैसे कम जगह में लगने वाले लघु उद्योगों के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। -नप्र