Tourist Place of Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिस वक्त शहर का पश्चिमी भाग पानी की समस्या से जूझ रहा था उस वक्त शहर के इस भाग में बहने वाली गंभीर नदी पर बांध बनाकर जिस तालाब का निर्माण किया गया वह आज भी जल आपूर्ति का बड़ा जरिया बना हुआ है। महाराजा तुकोजीराव (तृतीय) होलकर ने सन 1900 में अपने पुत्र यशवंतराव के नाम से इस तालाब का नामकरण किया और शहर को यशवंत सागर की सौगात मिली।

यशवंत सागर का विशाल आकार, अधिक बरसात होने पर बांध के खुलते दरवाजे और उससे गिरते जल का विहंगम दृश्य, यहां सारस का बड़ी तादाद में आना पर्यावरण प्रेमियों को खासा आकर्षित करता है। पर्यटन विभाग द्वारा यहां वाचिंग एरिया विकसित किया गया तो नगर निगम भी इसके विकास में अब रिटेनिंग वाल बनाने, स्टोन पीचिंग, रोड किनारे जाली लगाने और जैव विविधता विकसित करने की योजना बना रहा है।

यशवंत सागर केवल जल आपूर्ति के लिए ही आकर्षण का केंद्र नहीं है बल्कि यह अपने आप में कई खूबियों को समेटे हुए है। हाल ही में इसे रामसर साइट की सूची में शामिल किया गया है। यही नहीं यहां से होने वाले जल प्रदाय की ऐसी व्यवस्था की गई है कि कालोनियों में पाइपलाइन के जरिए आने वाला जल बिना पंप के प्राकृतिक ढंग से पहुंचाया जाता है।

हर वर्ष यहां आते हैं सारस

यूं तो शहर में हर वर्ष कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं लेकिन यशवंत सागर शहर का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां भारी तादाद में सारस आते हैं और वे यहां अपना जीवनचक्र चलाते हैं। इसके अलावा अन्य प्रजातियों के पक्षी भी यहां आते हैं। प्रवासी पक्षियों के यहां आने के कारण पक्षी प्रेमी भी यहां आते हैं। वर्तमान में तो यहां मछली पालन भी हो रहा है।

30 एमएलडी पानी शहर को प्रतिदिन मिलता है

यशवंत सागर के पानी को उपचारित कर उसे कालोनियों में प्रदाय किया जाता है। नदी पर बांध बने होने के कारण यहां वर्षभर पानी भरा रहता है और प्रतिदिन 30 एमएलडी जल प्रदाय होता है। यशवंत सागर की कुल क्षमता 19 फीट है, वर्षा काल में पानी बढ़ने पर बांध के गेट खोले जाते हैं। गर्मियों में जल स्तर 12 फीट तक पहुंच जाता है।

जैव विविधता की दिशा में भी होंगे कार्य

नगर निगम के इंजीनियर सुनील गुप्ता के अनुसार यशवंत सागर के विकास के लिए कई योजनाएं बनाई जा रही है। इसके तहत यहां रिटेनिंग वाल बनाने, स्टोन पीचिंग और रोड किनारे जाली लगाने की भी योजना है। चूंकि यह तालाब रामसर साइट की सूची में भी शामिल हो चुका है इसलिए यहां की जैव विविधता और भी बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे। जिसके लिए सघन पौधारोपण भी आसपास के क्षेत्र में किया जाएगा।

Posted By: Sameer Deshpande

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