- प्राणायाम व मुद्रा विषय पर हैदराबाद के विशेषज्ञ ने दी अहम जानकारियां

इंदौर (नईदुनिया रिपोर्टर)। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए और यदि कोई उसकी चपेट में आ भी गया है तो प्राणायाम और मुद्राओं द्वारा बेहतर स्वास्थ्य पाया जा सकता है। हस्त मुद्रा का अपना विज्ञान है। पंच महाभूतों का प्रतिनिधित्व हमारे हाथ की अंगुलियां करती हैं। अंगूठा अग्नि, तर्जनी अंगुली वायु, मध्यमा अंगुली आकाश, अनामिका अंगुली पृथ्वी और कनिष्ठिका अंगुली जल तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। अंगूठे और अंगुलियों की मदद से बनने वाली हस्त मुद्राओं के द्वारा हम शरीर के भीतर मौजूद पंच महाभूतों को नियंत्रित कर सकते हैं। यदि प्राणायाम के साथ मुद्राओं को भी शामिल किया जाए तो परिणाम और भी बेहतर मिलते हैं। असल में यह मुद्राएं उन बटन के समान हैं जिनको दबाते ही प्राणिक ऊर्जा प्रवाहित होने लगती है। यह बात हैदराबाद के योग एवं मुद्रा विशेषज्ञ रामचंद्र राजू कालिदिंदी ने वेबिनार में कही।

रविवार को संस्था एसबीपास द्वारा आयोजित वेबिनार में प्राणायाम और मुद्राओं द्वारा बेहतर स्वास्थ्य पाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। रामचंद्र राजू ने बताया कि कोरोना से बचाव और संक्रमित होने के बाद भी जल्दी स्वस्थ होने के लिए प्राणायाम में अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और उज्जायी करना लाभदायक होता है। अनुलोम-विलोम से पूरा स्वास्थ्य बेहतर रहता है तो भ्रामरी से भय व तनाव नहीं होता। जब भय व तनाव नहीं होता तो मन शांत रहता है। इस तरह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। उज्जायी प्राणायाम से फेफड़े बेहतर तरीके से क्रियाशील रहते हैं। प्राणायाम खाली पेट ही करना चाहिए। प्राणायाम करने का सबसे उपयुक्त समय सूर्योदय या सूर्यास्त की बेला का होता है।

मुद्राओं के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्राण मुद्रा, अपान मुद्रा, शून्य मुद्रा और गरुड़ मुद्रा बेहतर स्वास्थ्य के लिए हर किसी को करना चाहिए। प्राणायाम से हम जो प्राणिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं उसके प्रवाह को व्यवस्थित करने में मुद्राएं सहायक होती हैं। वेबिनार का संचालन डॉ. आलोक द्विवेदी ने किया और आभार नीति द्विवेदी ने माना।

कभी भी बनाई जा सकती है मुद्रा

प्राण मुद्रा : अनामिका और कनिष्ठा अंगुली के ऊपरी भाग को अंगूठे के ऊपरी भाग से मिलाएं और तर्जनी व मध्यमा अंगुली को सीधी रखें। यह मुद्रा दिन में 30 मिनट के लिए बनाई जाना चाहिए। इसे दिन में तीन बार 10-10 मिनट के लिए भी कर सकते हैं। यह मुद्रा प्राण के प्रवाह को नियंत्रित करती है।

अपान मुद्रा : मध्यमा और अनामिका अंगुली को अंगूठे के ऊपरी भाग से मिलाना होता है और तर्जनी व कनिष्ठा अंगुली सीधी रहती है। जिन्हें सांस फूलने की समस्या है उन्हें इस मुद्रा से लाभ मिलेगा। यह शरीर के विषैले तत्व भी बाहर निकालने में मदद करती है। यह मुद्रा कभी भी आधे घंटे के लिए बनाई जा सकती है। सीढ़ी चढ़ते वक्त भी यह मुद्रा बनाई जा सकती है।

शून्य मुद्रा : मध्यमा अंगुली को अंगूठे के निचले भाग से मिलाएं और शेष तीनों अंगुलियां सीधी रखें। यह हड्डी व हृदय के स्वास्थ्य लिए बहुत अच्छी मुद्रा है। यह फेफड़ों के कार्य को भी सुचारू करती है। भय, क्रोध आदि नकारात्मक विचारों को रोकती है। यह मुद्रा भी दिनभर में कभी भी 30 मिनट के लिए बनाना चाहिए।

गरुड़ मुद्रा : दोनों हाथ के अंगूठों को आपस में मिला लें और अंगुलियों को पूरी तरह से खुला व दूर-दूर रखें। यह शरीर में ऊष्मा उत्पन्ना करने वाली मुद्रा है इसलिए जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो वे इसे नहीं करें। इससे फेफड़े भी स्वस्थ रहते हैं। यह मुद्रा एक स्थान पर बैठकर या लेटकर ही बनाना चाहिए।

फोटोः रामचंद्र राजू के नाम से है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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