कॉलम : योगाचार्य की सलाह

पश्चिमोत्तानासन एक ऐसा आसन है, जो सात वर्ष के बच्चे से लेकर उम्रदराज व्यक्ति भी कर सकता है और यह पैर के अंगूठे से लेकर ललाट तक को लाभ पहुंचाता है। इस आसन को करने के लिए जमीन पर बैठ जाएं और दोनों पैर सीधे कर लें। दोनों हाथ जंघाओं के पास रख लें अब दोनों हाथों को बगल से ऊंचा करते हुए ऊपर ले जाएं। इस वक्त हथेलियां जमीन की ओर हों तथा जब हाथ ऊपर ले जाएं तो हथेलियां आमने-सामने हों। जब हाथ पूरी तरह से ऊपर हो जाएं तो हथेलियां सामने की ओर कर लें। हथेलियों को बार-बार मोड़ने से कंधे और हाथ की मांसपेशियों का व्यायाम होता है। अब कमर से आगे झुकते हुए हाथों से टखनों को छूने की कोशिश करें। इस दौरान कोहनी जमीन से लगाएं। इसके बाद हाथ से अंगूठा पकड़ने की कोशिश करें। इस प्रक्रिया में सिर घुटने पर लगाएं, लेकिन घुटने ऊपर न उठाएं। कुछ सेकंड इसी अवस्था में रुकने के बाद सामान्य अवस्था में वापस आ जाएं। इस आसन से पाचनतंत्र ठीक रहता है। कब्ज की समस्या नहीं होती, मधुमेह में भी आराम मिलता है, शरीर में शुद्ध रक्त का संचार होता है, पेट मजबूत होता है, लिवर, किडनी, आंत आदि की मालिश होती है। मेरूदंड, छाती, पसलियां आदि पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। जिन्हें पेट में अल्सर या स्लिप डिस्क की समस्या हो वे लोग यह आसन न करें।

- अर्चना विश्वकर्मा, योग विशेषज्ञ

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस