इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जो रिश्ते प्रेम और स्नेह दे रहे हैं उनमें आज तनाव क्यों है। यह सवाल हम लोगों के सामने अक्सर आकर खड़ा हो जाता है। इस सवाल का जवाब हमें ढूंढना होगा। इसके कारण का पता लगाना होगा। जब तक तनाव का कारण नहीं तलाशेंगे तब तक हल नहीं मिलेगा। यह जानना होगा कि छोटी-छोटी बातें बड़े विवाद का रूप क्यों ले रही हैं।

यह बात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी ने बुधवार को अभय प्रशाल रेसकोर्स रोड पर कही। वे परिवारों में संस्कारों की अहमियत विषय पर संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि परिवार में हमारी भूमिका एक-दूसरे को शक्तिशाली करना है ना कि दूसरों से उसकी तुलना, मजाक और चिंता कर उसको कमजोर करने की है। सोशल मीडिया का हम पर इतना प्रभाव हो गया है कि सामने होकर भी स्क्रीन पर एक-दूसरे को देखते हैं।

लोग घर में रहकर भी वाट्सअप पर बातें करते हैं। रिश्ते सोशल मीडिया पर नहीं एक-दूसरे की वाइब्रेशन से बनते हैं। हमें एक-दूसरे को राय देनी है लेकिन राय देने पर सामने वाला व्यक्ति नहीं मानता तो हमें डिस्टर्ब नहीं होना है। आज हमें यहां से यही सीख कर जाना है कि अलग-अलग मत वाले परिवार के दोनों सदस्य सही हैं बस दोनों का नजरिया और संस्कार अलग है। इस मौके फिल्म अभिनेता सुरेश ओबेराय ने कहा कि राजयोग से मेरे जीवन में खास परिवर्तन आया है। राजयोग के जरिए क्रोध से मुझे निजात मिली है।

मैं किसी बहन से कहूं की उसकी हरी साड़ी कितनी अजीब तो

मैं अगर किसी बहन से कहूं की उसकी हरी साड़ी कितनी अजीब है तो क्या होगा? वह कहेगी अरे सफेद साड़ी में कोई ऐसे स्पीच देता है और वह मेरी सफेद साड़ी को कुछ कहेगी। हरी साड़ी पसंद आने के उनके संस्कार हैं। मेरी सफेद साड़ी के मेरे अपने संस्कार हैं। मेरे आपके संस्कार जीवन भर अलग रहेंगे लेकिन रिश्तों में एक-दूसरे में रिस्पेक्ट रहना चाहिए।

रिश्तों को मिठास रखने के लिए दिए ये सूत्र

- हमेशा याद रखें कि बाहरी परिस्थितियां आपके बस में नहीं हैं लेकिन उन परिस्थितियों के बारे में सोचना और उसे बड़ी या छोटी बनाना आपके बस में है।

- रिश्तों में कभी भी अडियल रुख नहीं अपनाएं। संबंधों में जितना झुकेंगे रिश्ते उतने मजबूत होंगे।

- हर रिश्ते का अपना जन्म-जन्मांतर का सफर है। उसके अपने अनुभव के आधार पर उसके संस्कार बने हैं। उसके संस्कार से अपने संस्कारों को श्रेष्ठ मानने की गलती न करें।

- अपने परिवार के किसी सदस्य के किसी संस्कारों को बदल नहीं सकते तो उसे स्वीकार करें और उसे सही रास्ता भी दिखाए लेकिन ये सोचकर दुखी न हो कि वह आपकी बात नहीं मानता।

- दो अलग-अलग संस्कार के लोग विवाह बंधन में बंधकर एक-दूसरे को समझने की बजाए अपने जैसा बनाने की कोशिश करते हैं।

बताई इंदौर जोन की 50 वर्ष की स्वर्ण गाथा

इंदौर जोन का स्वर्ण जयंती समारोह सुबह अभय प्रशाल में आयोजित किया गया। इसमें जोन के 50 वर्ष की गाथा नृत्य नाटिका के जरिए शांति निकेतन की कन्याओं ने प्रस्तुत की। इस मौके पर ब्रह्माकुमारी शिवानी ने कहा कि हमारी आज की समस्याओं का समाधान किसी एक व्यक्ति या नियम से नहीं होगा। उसके लिए हम सबको अपने मन और संस्कार में परिवर्तन करने की जरूरत है। अभिनेता सुरेश ओबेरॅाय ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन और दीदी शिवानी के मार्गदर्शन में उनकी सभी बुराइयां समाप्त हो चुकी हैं।

अब वह जीवन एक बुरे सपने की तरह से लगता है। मुझ में आए परिवर्तन से मुझे प्रेम हो गया है। इस मौके पर इंदौर जोन की निदेशिका कमला दीदी, उषा बहन, उज्जौन और शक्ति निकेतन की संचालिका ब्रह्माकुमारी ने शुभकामना व्यक्त की। मुख्य क्षेत्रीय समन्वयक हेमलता दीदी ने सभी का स्वागत किया। संचालन ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने किया।

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