इटारसी नवदुनिया प्रतिनिधि।

ग्रीष्मकालीन अवकाश एवं शादी-विवाह के चलते इन दिनों ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ टूट रही है। आलम यह है कि शयनयान और सामान्य दर्जे की बोगियों में भेड़ बकरियों की तरह यात्री सफर करने को मजबूर हैं। इन बोगियों में निर्धारित बर्थ से दोगुना संख्या में यात्री बैठ रहे हैं। खासकर मुबंई से उप्र-बिहार जाने वाली एवं उत्तर भारत से महाराष्ट्र जाने वाली ट्रेनों में पैर रखने की जगह तक नहीं हैं।

शनिवार को सामने आईं इन दो तस्वीरों से यात्रियों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। शुक्रवार शाम वास्कोडिगामा से पटना जा रही पटना एक्स. के सामान्य कोच के शौचालय में भी यात्री सफर कर रहे थे, हालात इतने दयनीय हैं कि यहां भी जगह छूटने के डर से यात्री बाहर तक नहीं उतर रहे हैं, कई यात्री शौचालय में बैठकर बदबूदार माहौल में खाना खाते हुए नजर आए।

नहीं मिल रही राहतः रेलवे भले ही दावा कर रही है कि यात्रियों के दबाव को देखते हुए ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाए जा रहे हैं, साथ ही समर स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा है कि रेलवे के इतंजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।

आरक्षण कार्यालय के अनुसार आगामी एक माह तक यह हालात रहेंगे। पवन, जनता, कुशीनगर, पठानकोट, मंगला, कामायनी, जीटी, पटना सुपर, काशी, तमिलनाडु, गोरखपुर एक्सप्रेस समेत इन रूट पर चलने वाली ट्रेनों में आसानी से बर्थ उपलब्ध नहीं हैं, कई ट्रेनों में नो रूम या लंबी वेटिंग मिल रही है।

स्लीपर में भी कब्जाःजब जनरल बोगियां ठसाठस भरी हैं तो मजबूर यात्री स्लीपर कोच में भी चढ़ते हैं, इस वजह से आरक्षण पर यात्रा कर रहे यात्रियों को समस्या होती है। अनाधिकृत चढ़ने वाले यात्री के पास वेटिंग टिकट होता है, या कई बार वे जुर्माना देकर कोच में कब्जा कर लेते हैं। भीषण गर्मी में जब सूरज आग उगल रहा है, तब बोगियां भट्टियों की तरह तपती हैं, ऐसे हाल में भेड़-बकरियों की तरह कैद होकर यात्री सफर करने को मजबूर हैं। रेलवे करीब 145 यात्री ट्रेनों को यहां स्टापेज दे रहा है।

स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों को पीने के पानी के लिए भी कतार में लगना पड़ता है।

यहां नल स्टेंड, वाटर वेडिंग मशीन और दो प्याऊ होने के बाद भी जलसंकट का सामना यात्रियों को करना पड़ता है। कई बार पानी भरने के चक्कर में ट्रेन चूक जाती है और यात्री दौड़ते हुए चलती ट्रेन में बैठते हैं।

खतरे का सफर कर रहे यात्रीः

जगह न मिलने की मजबूरी में यात्री कोच के पायदान, कपलिंग, शौचालय, कारीडोर और बर्थ में चादर बांधकर यात्रा कर रहे हैं, यह लापरवाही कई बार जानलेवा हो सकती है। महिला, बुर्जुग और बच्चों को कोच में पर्याप्त हवा और सांस तक न मिलने से कई बार उनका दम घुटने लगता है। बढ़ती आबादी के कारण भी यह हालात निर्मित हो रहे हैं, जिससे रेलवे के तमाम इतंजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।

वर्जन

कई ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाए जा रहे हैं, ग्रीष्मकालीन ट्रेनों की संख्या भी बढ़ी है। भीड़ ज्यादा होने के कारण यात्री शौचालय या पायदान में बैठकर सफर करते हैं, पानी के लिए भी सभी स्टेशनों पर प्याऊ संचालित हो रहे हैं।

सूबेदार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी रेलवे।

फैक्ट फाइलः

रोजाना यात्री ट्रेनें: 145

यात्रियों की संख्याः 20 हजार रोजाना।

Posted By: Nai Dunia News Network

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