इटारसी नवदुनिया प्रतिनिधि। 10 सितंबर को नागपुर रेलवे आउटर पर जुझारपुर के पास मिलीं तीन लावारिस राइफलों एवं 10 जिंदा कारतूस के मालिक को खोजने में जीआरपी को पसीना छूट रहा है। आरपीएफ से हथियार सुर्पुदगी के बाद जीआरपी ने सीसीटीएनएस एवं एनसीआरबी के जरिए कई राज्यों में जानकारी जुटाई, लेकिन देश में कहीं भी हथियार चोरी या गुमने की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। जीआरपी अब कह रही है कि करीब एक लाख कीमत के तीनों हथियार किसी सुरक्षा एजेंसी से जुड़े कर्मचारी के रहे होंगे, जिनकी रिपोर्ट कार्रवाई के डर से नहीं कराई गई है, हालांकि पुलिस अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है, अन्य बिंदुओं पर भी इस मामले की जांच जारी है।

राज्य स्तर पर डाटाः लाइसेंसी हथियारों का निर्माण करने वाली कंपनियां हथियार के बार कोड का डाटा दिल्ली मुख्यालय को भेजती हैं। जीआरपी ने यहां भी संपर्क साधा, लेकिन वहां कहा गया है कि बार कोड का डाटा राज्य स्तर पर रखा जाता है, यदि संबधित राज्य का नाम पता होगा, तभी हथियार का डाटा मिल सकता है। जीआरपी इसलिए परेशान है कि हथियार किस राज्य के हैं, यह कैसे पता चलेगा। एफएसएल से भी बात की गई, वहां सिर्फ इतना पता चल सकेगा कि हथियार चालू है या नहीं। दरअसल हथियार बनाने वाली कंपनियां अपना ट्रेडमार्क और सीरियल नंबर देती हैं, जिसका उल्लेख लाइसेंस पर भी होता है, लेकिन इसके लिए संबधित राज्य का हवाला देना होता है। जीआरपी को यह नहीं पता कि हथियार किस राज्य से हैं और यह भी नहीं पता कि किस ट्रेन से इन्हें लाया या फेंका गया था, इस वजह से लावारिस हथियारों की गुत्थी सुलझना मुश्किल हो गया है।

झांसी से बेरंग लौटी टीमः इस मामले में झांसी से एपी एक्सप्रेस में बरामद हथियारों की जांच के लिए भी एक टीम भेजी गई थी, लेकिन इस मामले के तार झांसी से नहीं जुड़े। बताया गया है कि झांसी में बरामद हथियारों का जम्मू कश्मीर कनेक्शन सामने आया था, इस वजह से जीआरपी बेरंग लौट आई। पुलिस ने कई राज्यों की पुलिस से संपर्क साधकर यह पता लगाया कि कहीं इस तरह के हथियारों की चोरी एवं गुमने जैसी शिकायत तो नहीं है, लेकिन पिछले एक माह में ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया है।

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हमने देश के कई राज्यों से संपर्क साधा, लेकिन कहीं भी हथियार चोरी या गुमने संबंधी रिपोर्ट नहीं मिली। एफएसएल जांच से सिर्फ हथियारों की रिपोर्ट मिलेगी। यह पता चले कि हथियार किस राज्य के हैं, तभी दिल्ली से डाटा मिल सकता है। आशंका है कि हथियार सुरक्षा एजेंसी में काम करने वाले कर्मचारियों के हैं और नौकरी जाने या एजेंसी पर कार्रवाई के डर से रिपोर्ट नहीं डाली गई।

विभेन्दु व्यंकट टांडिया, टीआइ जीआरपी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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