इटारसी (होशंगाबाद)। देश के बड़े रेल जंक्शन पर आए दिन लाशों के साथ दुर्गति के नजारे देखने को मिलते हैं। सफर के दौरान तबीयत बिगड़ने, ट्रेन की चपेट में आने, चलती ट्रेन से बाहर गिरने या बेसहारा घूमने वाले लोगों की लावारिश लाश जीआरपी जब्त कर मर्ग कायमी करती है। स्टेशन पर मिलने वाली लाशों को उठाकर लाने वाले सलीम- गोविंद की जोड़ी सालों से यह काम कर रहे हैं। इन्हें खुद रहने को पक्की छत नसीब नहीं है। इनकी कच्ची झोपड़ी में ही आगरा के युवक का शव रखा गया था।

कई बार 2-2 दिन लाशें परिजनों के इंतजार में बिना सुरक्षा रखी रहती हैं। इससे पूरे परिसर में संक्रमण और बदबू फैलती है। कई लाशों को देख महिलाएं एवं बच्चे असहज हो जाते हैं। सालों पहले प्रस्तावित मर्चुरी रूम को बनाना रेलवे भूल गई, क्योंकि यहां जिंदा यात्रियों की परवाह नहीं कि जाती ऐसे में मृत लाशों की हिफाजत को लेकर कोताही बरती गई। कर्नाटका एक्स से उतारी गई लाश की आंखें चूहों द्वारा कुतरने की घटना को लेकर अब हड़कंप मच गया है। आला अधिकारियों ने भी पूरी घटना की जांच को कहा है। ट्रेन में युवक की मौत के बाद इटारसी में शव को उतार लिया गया था, इसके बाद उसे एक झोपड़ी में रखा गया था। जब शव को परिजनों को सौंपा जा रहा था तब पता चला कि चूहों ने लाश की आंखें कुतर ली है। परिजनों ने इसकी शिकायत की जिसके बाद हड़कंप मच गया।

इस सड़े हुए पटिए पर रखी जाती हैं लाश। यहां लाश उठाने वाले कटनी निवासी गोविंद आदिवासी कोयले के इंजन चलने के दौर से यहां काम कर रहे हैं। लाश को उठाने के 1 हजार रुपए मिलते हैं। उनका कहना है कि यहां लाश रखने का कोई इंतजाम नहीं हैं। लाश रखने के बाद इसी झोपड़ी में वे रहते हैं और यहीं खाना बनाकर सो जाते हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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