इटारसी नवदुनिया प्रतिनिधि।

रेलवे से अपने पार्सल बुक करने वाले ग्राहकों के लिए अब स्पीड पोस्ट की तरह ट्रेकिंग सिस्टम की सुविधा दी जाएगी। इटारसी समेत जबलपुर जोन के 11 बड़े स्टेशनों पर यह सुविधा शुरू हो गई है।

पार्सल यातायात को ट्रेक करने के लिए पश्चिम मध्य रेल ने कम्प्यूटरीकृत पार्सल प्रबंधन प्रणाली (पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम) से जोड़ा है, इस सिस्टम शुरुआत होने से इससे लगेज को ट्रेक करना काफी आसान हो गया है। सामान लोड होते ही बुक करने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर एक संदेश आ जाएगा, गंतव्य पर पहुंचने के बाद भी उसको उसी माध्यम से सूचित किया जाएगा। पार्सल प्रबंधन प्रणाली से रेल कर्मचारियों को भाड़े की स्वचलित गणना और मानवीय गलतियों में कमी आएगी।ग्राहकों को परिवहन के दौरान पार्सलों के वर्तमान स्थिति की सटीक जानकारी प्राप्त होगी, साथ ही बुकिंग एवं वजन में कम समय लगेगा। पार्सल की वर्तमान जानकारी को वेबसाइट पर देखा जा सकेगा।

रेलवे में पार्सल प्रबंधन प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य पार्सल यातायात में वृद्धि कर पार्सल आय को बढ़ाना, पार्सल जगह का अधिकतम उपयोग उपयोग, दावों को कम करन, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाकर ग्राहक संतुष्टि से रेलवे की छवि में सुधार लाना है। पश्चिम मध्य रेल के तीनों मण्डलों पर 11 रेलवे स्टेशनों पर पार्सल प्रबंधन प्रणाली की सुविधा उपलब्ध हैं। जबलपुर मण्डल में जबलपुर, कटनी, सतना, रीवा एवं पिपरिया, भोपाल मण्डल पर भोपाल, बीना एवं इटारसी स्टेशन पर और कोटा मण्डल पर कोटा, सवाई माधोपुर एवं भरतपुर स्टेशनों पर पार्सल यातायात के लिए यह सुविधा दी गई है।

यह है सिस्टम की विशेषताः

.पार्सलों का वजन इलेक्ट्राानिक तुलाई मशीन से सीधे कम्प्यूटर द्वारा किया जाता है

एक ही खिड़की पर बुकिंग एवं नगद भुगतान संभव है।

.गंतव्य स्टेशन को आवक यातायात के बारे में पूर्व सूचना प्राप्त होती है।

प्राथमिकता के अनुसार लदान किया जाता है।

.बार कोड तकनीक की सहायता से पैकेज की ट्रेसिंग आसान हो जाती है।

.प्राथमिकता के अनुसार लदान होगा, इससे भ्रष्टाचार एवं शिकायतों में कमी आएगी।

प्रबंधन हेतु जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी।

.पार्सल यातायात में वृद्धि से पार्सल आय में बढ़ोत्तरी होगी ।

.मध्यवर्ती स्टेशनों को लदान किए गए पार्सलों के बारे में अग्रिम जानकारी होती है, जिससे पार्सल जगह का अधिकतम उपयोग होता है, ओवर कैरी पर नियंत्रण किया जा सकता है।

लापता हो जाते हैं पार्सलः

अभी रेलवे से आए दिन पार्सल गुमने, गंतव्य की जगह आगे स्टेशनों तक पहुंचने, फटने या खराब होने जैसे मामले सामने आ चुके हैं। कपड़ा कारोबारी राहुल चेलानी को पिछले तीन सालो में छह बार पार्सल गुमने की समस्या झेलना पड़ी, इसके अलावा अन्य व्यापारियों के पार्सल भी गुम गए, जिनका आज तक पता नहीं चला।

Posted By: Nai Dunia News Network

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