इटारसी नवदुनिया प्रतिनिधि।

मंगलवार रात दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के गोंदिया-गुदमा रेलवे स्टेशन के बीच रात 1ः20 बजे बड़ा रेल हादसा हुआ। बिलासपुर से भगत की कोठी जा रही 20843 भगत की कोठी एक्सप्रेस खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। देर रात हादसे के वक्त ट्रेन के अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। सुबह 6ः20 मिनट पर यहां आने वाली यह ट्रेन बुधवार को पूरे 10 घंटे देरी से शाम 4 बजे इटारसी स्टेशन पहुंची। हादसे में जख्मी हुए यात्री भी ट्रेन में सफर कर रहे थे। रेलवे ने उनकी सुविधा को देखते हुए रेलवे अस्पताल की मेडिकल टीम को ट्रेन अटेंड करने के निर्देश दिए थे। अधीक्षक डा. शिवम कुलश्रेष्ठ, स्टेशन प्रबंधक देवेन्द्र सिंह चौहान, मंडल वाणिज्य निरीक्षक विकास कुमार के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अंदर जाकर जख्मी यात्रियों को दर्दनिवारक दवाएं बांटी। यात्रियों से पूछा गया कि उन्हें किसी तरह की तकलीफ तो नहीं है।

ट्रेन के एस-3 कोच में सफर कर रहे युवक लोकेश राजपूत ने कहा वह भाटापारा से उज्जैन जा रहे थे। रात में सभी लोग नींद में थे, अचानक जोरदार झटका लगा, बर्थ पर सो रहे यात्री अचानक नीचे गिर गए। अधिकांश यात्रियों के सिर में बर्थ से टकराने या नीचे गिरने से सिर की चोट पहुंची है। दुर्ग से जयपुर जा रहे राजेन्द्र कुमार ने बतायाकि हमें ऐसा लगा पूरी ट्रेन हिल गई, संभलने का मौका ही नहीं मिला। कई यात्रियों के साथ सो रहे बच्चे, बर्थ पर रखा सामान भी गिर गया। रायपुर से भोपाल जा रहे बृजपाल सेन ने कहा उनके सिर में गंभीर चोट आई है। गोंदिया में प्राथमिक इलाज करा दिया गया। करीब 50 यात्री हादसे में जख्मी हुए थे, जिनकी हालत गंभीर रही या जिनकी चोट गहरी थी, उन्हें रेलवे ने अस्पताल में भर्ती कराया।

10 घंटे देरी से आई ट्रेनः

सुबह आने वाली ट्रेन हादसे की वजह से 10 घंटे देरी से दोपहर 3ः51 मिनट पर प्लेटफार्म 3 पर पहुंची। यात्रियों ने बताया कि हादसे में एस-3 कोच के चार पहिए ट्रेक से उतर गए थे, घटनास्थल पर हाहाकार मच गया, जख्मी यात्री चीख-पुकार रहे थे, वहां अंधेरा था, इस वजह से काफी परेशानी हुई। रात 2ः30 बजे मेडिकल वैन पहुंची, इसके बाद राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। सुबह 8 बजे तक पटरी से उतरी एस-3 बोगी को वापस चढ़ाया गया। इस कोच को क्षतिग्रस्त होने के कारण हटाया गया, दूसरा कोच लगाकर यात्रियों को दूसरी बर्थ दी गई। रात में हुए हादसे का खौफ हर यात्री के चेहरे पर देखने को मिला। अधिकांश यात्री जख्मी हुए हैं, कुछ बच गए। कुछ यात्री जख्मी नहीं हुए, लेकिन झटका लगने से उनकी रीढ़ की हड्डी में तकलीफ बढ़ गई। ट्रेन में महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे भी थे। बिलासपुर से अपने बच्चों के साथ जयपुर जा रही महिला अंशु गरदिया ने कहा कि हम साइड बर्थ पर सो रहे थे, अचानक ब्रेक लगे और झटके में वे बच्चों समेत नीचे गिर गईं, उनके सिर में लोहे की राड लगने से खून आ गया। कोच में अंधेरा था, बच्चे सहम गए, यात्री चीख-पुकार मचाने लगे, किसी को समझ नहीं आया कि यह कैसे हुआ।

स्वजनों के आए फोनः

हादसे की खबर लगते ही इस ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के स्वजनों की हालत खराब हो गई, स्वजनों ने तत्काल अपने लोगों को काल किया और उनकी खैर-खबर ली। कई यात्रियों के मोबाइल गुम हो गए थे, बाद में किसी तरह उनका संपर्क हुआ। यात्रियों की सुविधा को लेकर गोदिंया स्टेशन पर हेल्प डेस्क प्रारंभ की गई है। गंतव्य तक आने वाले हर बड़े स्टेशन पर यात्रियों को मेडिकल सुविधा एवं दवाएं प्रदान करने का इतंजाम किया गया। स्टेशन प्रबंधक देवेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि कंट्रोल मैसेज पर ट्रेन को अटेंड किया गया। अस्पताल अधीक्षक डा. शिवम कुलश्रेष्ठ के साथ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने सभी यात्रियों की जांच कर उन्हें दवाएं वितरण किया। टीटीई एचएस त्रिपाठी, डा. वैष्णवी पिल्लई, डा. सालोम वर्गीज, दीपक सिंह, पायलेट सोनू मेहरा, मनोज चौहान, दिगंद्र सिंह एवं रेलवे अस्पताल का स्टाफ मौजूद रहा।

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