इटारसी नवदुनिया प्रतिनिधि।

पश्चिम मध्य रेलवे में तेजी से हुए विद्युतीकरण के बाद रेलवे ने डीजल इंजनों पर होने वाले करीब 600 करोड़ रूपये के ईंधन की बचत की है।भारतीय रेल के सभी जोनल रेलवे पर विद्युतीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। पूर्ण विद्युतीकरण करने वाला यह पहला जोन है। इस वजह से एचएसडी आइल (डीजल) की खपत में पश्चिम मध्य रेल में भारी कमी हुई है। भारतीय रेलवे पर ईंधन खपत करने को कम करने में सबसे अधिक कमी आई है। इलेक्ट्रिक इंजनों की उपयोगिता में वृद्धि और डीजल इंजनों की उपयोगिता में कमी हुई है, इसके अलावा क्रू बिट्स और लोको लिंक में इलेक्ट्रिक इंजनों का उपयोग किया जा रहा है। पश्चिम मध्य रेल पर ट्रैक्शन और नान ट्रेक्शन में एचएसडी आइल (डीजल) का उपयोग किया जा रहा है।

ट्रेक्शन में डीजल की खपतः

गौरतलब है कि पमरे ने डीजल इंजनों में वर्ष 2019-20 में अप्रेल से दिसंबर माह तक एचएसडी आइल (डीजल) दस लाख किलोलीटर और वर्ष 2021-22 में अप्रेल से दिसंबर माह तक एचएसडी ऑयल 27 हजार किलोलीटर उपयोग कर खपत किया गया है जो कि पुर्व की तुलना में 73 हजार किलोलीटर की भारी कमी हुई है। पमरे ने डीजल ईंधन खपत से लगभग रुपये 584 करोड़ की बचत की है।

पमरे पर नान ट्रेक्शन में डीजल की खपतः

पमरे में नान ट्रेक्शनों जैसे डीजी सेट्स, एलएचबी कोच, वर्कशाप एवं शेड, ट्रेक मशीनों, एलसी गेटों एवं छोटे स्टेशनों पर एचएसडी आइल (डीजल) की उपयोगिता में कमी हुई है। पमरे ने नान ट्रेक्शन के अंतर्गत वर्ष 2019-20 में अप्रेल से दिसंबर माह तक एचएसडी आइल (डीजल) 2000 किलोलीटर और वर्ष 2021-22 में अप्रेल से दिसंबर माह तक एचएसडी आइल 800 किलोलीटर उपयोग किया गया है।पूर्व की तुलना में 1200 किलोलिटर की कमी हुई है, इसमें भी पमरे ने डीजल ईंधन खपत में लगभग 10 करोड़ रुपये की बचत की है।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local