जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। लाइलाज एचआइवी संक्रमण गर्भ में पल रहे शिशुओं का बाल भी बांका नहीं कर पाया। वायरस से संक्रमित 34 महिलाओं ने उन्हें जन्म दिया जो एचआइवी से पूरी तरह सुरक्षित रहे। यह आंकड़े एल्गिन अस्पताल के हैं जहां चिकित्सकों व कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर एचआइवी संक्रमित महिलाओं का प्रसव कराया। कुछ महिलाओं ने सीजेरियन प्रसव (ऑपरेशन) से शिशुओं को जन्म दिया। बीते 46 माह में एल्गिन अस्पताल में करीब 135 एचआइवी संक्रमित महिलाएं चिन्हित की गईं। इनमें 34 पहले से एचआइवी की चपेट में थीं। विदित हो कि 200 बिस्तर क्षमता वाला एल्ग्नि अस्पताल जिले का सबसे बड़ा प्रसूति केंद्र है।

जन्म के तुरंत बाद से 45 दिन तक दवा: चिकित्सकों का कहना है कि गर्भ में पल रहे शिशुओं को एचआइवी संक्रमण का खतरा नहीं रहता है। गर्भस्थ शिशु प्लेसेंटा के जरिए मां से जुड़ा रहता है जिसके चलते एचआइवी वायरस उस तक नहीं पहुंच पाता। परंतु प्रसव के दौरान संभवित जोखिम व मां के शरीर से निकलने वाले खून के संपर्क में आने के कारण उनमें एचआइवी संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए जन्म के तुरंत बाद एचआइवी संक्रमण से बचाव में उपयोगी दवा उन्हें पिलाई जाती है। इस दवा की एक खुराक शिशु को 45 दिन तक नियमित रूप से दी जाती है।

सीजेरियन में जोखिम, दवाओं का सहारा: गर्भावस्था के दौरान एचआइवी संक्रमित महिला की समय—समय पर जांच व उपचार तथा प्रसव कराना जोखिम भरा रहता है। एल्गिन अस्पताल के चिकित्सक कहते हैं कि सीजेरियन प्रसव के दौरान अतिरिक्त सावधानी रखनी पड़ती है। कई बार ऐसा भी हुआ जब एचआइवी संक्रमित महिला के सीजेरियन के दौरान आॅपरेशन करने वाले चिकित्सक खतरे में पड़ गए। ऐसे मामलों में चिकित्सक को वायरस से छुटकारा पाने के लिए दवाइयों का सेवन करना पड़ता है।

कोरोना के कारण कम हो पाई जांचें: सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम के सहारे मातृ व शिशु मृत्यु दर प्रभावी रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को पंजीकृत कर प्रसव तथा उसके बाद तक देखभाल की जाती है। उन्हें पोषण आहार दिया जाता है ताकी बच्चा कुपोषित न हो। उनकी एचआइवी जांच कराई जाती है। कोरोना के कारण योजना प्रभावित हुई है। साल बीतने की कगार पर है सिर्फ 5 हजार 560 गर्भवती महिलाओं की एचआइवी जांच हो पाई है।

इनका कहना है—

एचआइवी संक्रमित महिलाओं के उपचार व प्रसव की दिशाा में एल्गिन अस्पताल में बेहतर कार्य किए गए। एचआइवी संक्रमित मां से जन्मे बच्चों को 45 दिन नियमित दवा की खुराक देकर संक्रमण से बचाया जाता है।

डॉ. संजय मिश्रा, आरएमओ

Posted By: Ravindra Suhane

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