जबलपुर, भी नईदुनिया प्रतिनिधि।पश्चिमी देशों में रोबोट से 60 प्रतिशत आपरेशन किए जा रहे हैं। भारत तेजी से प्रगति कर रहा है। ऐसे में रोबोटिक सर्जरी की दिशा में कठम उठाने चाहिए। उक्त बातें जर्मनी से आए शिशु यूरोलाजिस्ट डा. अहमद हदीदी ने कही। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल शिशु शल्य क्रिया विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिशु यूरोलाजी की दसवीं राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह को वे संबोधित कर रहे थे। डा. हदीदी ने आगे कहा कि भारत में रोबोटिक सर्जरी का आंकड़ा फिलहाल एक प्रतिशत भी नहीं है।

मेडिकल कालेज अस्पताल में रविवार को राष्ट्रीय शिशु यूरोलाजी की दसवीं राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हुआ। इस दौरान यूरोलाजी संबंधी बीमारियों से ग्रस्त सात बच्चों के आपरेशन किए गए। पेशाब की नली की बीमारियों से पीड़ित बच्चों के आपरेशन आधुनिक दूरबीन पद्धति से किए गए। छह माह के एक बच्चे की जटिल आपरेशन किया गया। शिशु शल्य क्रिया विभागाध्यक्ष डा. विकेश अग्रवाल ने बताया कि इस दौरान छह माह के एक ऐसे बच्चे का आपरेशन किया गया जो जन्मजात दुर्लभ शारीरिक विकृति की चपेट में था। बच्चे की जन्म से एक ही किडनी है जो उसके लिंग से जुड़ी थी। किडनी में सूजन आ जाने के कारण बच्चे को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस बच्चे का सफल आपरेशन मेडिकल में किया गया। डा. अग्रवाल ने बताया कि बच्चों में इस तरह की विकृति का पता गर्भ में ही लगाया जा सकता है। इस बच्चे का जब जन्म नहीं हुआ था तभी विकृति का पता चल गया था। जिसके चलते समय से उसका उपचार संभव हो पाया। उन्होंने बताया कि दुनियाभर से आए विशेषज्ञों ने रोबोटिस सर्जरी पर विचार व्यक्त किए।

चार दिवसीय संगोष्ठी में 105 बच्चों का आपरेशन के लिए पंजीयन किया गया था। 26 बच्चों का आपरेशन देश विदेश से आए नामी विशेषज्ञों ने किया। डा. विकेश अग्रवाल ने बताया कि शेष बच्चों का आपरेशन जल्द ही मेडिकल में किया जाएगा। इस दौरान सांस्कृतिक आयोजन भी हुए। सरोद वादक हिमांशु सेन ने देश विदेश से आए 250 से ज्यादा शिशु यूरोलाजी विशेषज्ञों का मन माेह लिया।

Posted By: Jitendra Richhariya

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