जबलपुर (नईदुनिया रिपोर्टर)। युवा पीढ़ी के साहित्यकारों के साहित्यिक उपक्रम में उनकी रचनाएं और लेखन से परिचित कराने का एक अनुपम क्रियाकलाप एक रचनाकार दो रचनाएं। हिंदी साहित्य को समृद्ध करने वाले रचनाकार डॉ रामकुमार वर्मा प्रसिद्ध साहित्यकार हुए हैं जो एक कवि, नाटककार, व्यंगकार, उपन्यासकार, एकांकी सम्राट और समीक्षा जैसी बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे। रामकुमार वर्मा ने हिंदी की हिमायत की और हिंदुस्तानियों से कहा कि यह देश अंग्रेजी का दीवाना क्यों है? स्वतंत्र देश के नागरिकों को अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए देवनागरी लिपि की हिंदी भाषा सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक भाषा है। यह हमारी भाव भूमि है। जिस पर हम भारतीयों को गर्वित होना चाहिए ।

बहुमुखी प्रतिभा के सशक्त साहित्यकार के रूप में रामकुमार वर्मा ने अपनी लेखनी को चलाया और हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। आधुनिक कवियों में रामकुमार वर्मा जी का अपना एक विशिष्ट स्थान है। अनेक कृतियों के रचयिता, अनेक पुस्तकों के रचयिता जिनकी रचनाओं में भाव और कल्पना की प्रधानता है। जिन की अनुभूति करुणामूलक है। जिनको सुख के क्षण में भी दुख की छाया दिखाई दे जाती हैं जन्म में मृत्यु तथा प्रभात के प्रकाश में संध्या की कालिमा दिखाई देती है। इनकी कविताओं में निराशा का भाव अवश्य है। पर छायावाद के रूप में उन्होंने कल्पनाओं को अभिव्यक्त किया।

प्रमुख छायावादी कवियों में रामकुमार वर्मा अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। राष्ट्रीयता और विश्व बंधुत्व की भावना का स्पष्ट चित्रण उन्होंने किया इनके काव्य में विश्वव्यापी वेदना का तीखा स्वर है ,अलंकारिक काव्य रचना उत्कृष्टता की पर्याय है जबलपुर शहर के कवि डॉ दुर्गेश व्यवहार ने अब पढ़ाई नहीं रुकेगी के लर्निंग प्लेटफॉर्म पर अपनी रचना एवं डॉ रामकुमार वर्मा की रचनाओं का सस्वर वाचन किया निश्चित ही पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए यह बहुत ही उपयोगी होगा। प्रमोद श्रीवास्तव द्वारा अब पढ़ाई नहीं रुकेगी एवं शिक्षक काव्य दीप्ति मंच के माध्यम से इन अनूठे कार्यों का सृजन और प्रसारण किया जा रहा है। इसमें राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अध्यापिका डॉ संध्या जैन श्रुति का कुशल मार्गदर्शन है। संयोजना प्रमोद श्रीवास्तव की है।

Posted By: Ravindra Suhane

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