ब्रजेश शुक्ला, जबलपुर। भगवान जगन्नाथ का धाम पुरी। यहां भगवान की रथ यात्रा देखने के लिए लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। कुछ इसी तरह का नजारा संस्कारधानी में दिखाई देता है। इस बार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा एक जुलाई को निकाली जाएगी। जिसमें भगवान जगन्नाथ स्वामी, बहन सुभ्रदा और भाई बलराम के साथ प्रजा का हाल जानने के लिए निकलेंगे। शहर में लगभग 155 साल से रथ यात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है। जिसमें हजारों लोग रथ खींचने के लिए तैयार रहते हैं। शहर के मुख्य मार्गों से निकाली जानेवाली रथ यात्रा में जगदीश मंदिर गढ़ाफाटक, वात्री साहू समाज, जगदीश मंदिर हनुमान और बंगाली समाज के रथ शामिल होते हैं। मंदिरों के रथ बड़ा फुहारा में पहुंचकर एक साथ निकलकर हनुमानताल पहुंचते हैं।

जगदीश मंदिर गढ़ाफाटक:

गढ़ाफाटक में भगवान जगदीश का प्राचीन मंदिर है। इसका लगभग 500 साल का इतिहास है। मंदिर से लगभग 155 साल से भगवान की रथ यात्रा निकाली जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी रथ खींचने के लिए पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि लू लगने के बाद जब भगवान स्वस्थ होते हैं तो प्रजा का हाल जानने केलिए रथ में निकलते हैं। खास बात यह है कि भगवान को एक क्विंटल भात का प्रसाद अर्पण किया जाता है। प्रसाद पाने के लिए भक्त रथ के सामने हाथ पसार के पहुंचते हैं। विभिन्न मार्गों से भ्रमण करने के पश्चात रथ यात्रा का विश्राम मंदिर में होता है।

हनुमानताल में 1870 में हुई स्थापना :

जगदीश मंदिर हनुमानताल की स्थापना वर्ष 1870 में हुई थी। यहां भगवान जगन्न्ाथ स्वामी, बहन सुभद्रा और भाई बलराम की भव्य प्रतिमा है। मंदिर से लगभग 123 साल से रथ यात्रा निकाली जा रही है। जो मुख्य यात्रा में शामिल होती है।

साहू समाज 132 साल से निकाल रहा रथ यात्रा :

शहर में वात्री साहू समाज के तत्वावधान में श्री जगदीश स्वामी कर्मा माई शंकर भगवान मंदिर ट्रस्ट द्वारा 132 वर्षों से भगवान जगन्न्ाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जा रही है। इस वर्ष रथ यात्रा का 132वां वर्ष होगा। यह मंदिर लगभग 151 साल प्राचीन है। घमंडी चौक स्थित मंदिर का निर्माण कार्य होने के कारण भगवान का अस्थायी मंदिर साहू धर्मशाला गढ़ाफाटक में बनाया गया है। यहां भगवान का प्रतिदिन पूजन किया जाता है। रथ यात्रा के दिन समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्र होकर भगवान की सेवा में शामिल होते हैं। दोपहर के समय मंदिर से रथ यात्रा शुरू होती हैजो बड़ा फुहारा में मुख्य यात्रा में शामिल होती है। यहां से जगदीश मंदिरों के रथ एक साथ आगे बढ़ते हैं।

मां कर्मा देवी ने लगाया था भगवान को भोग :

उल्लेखनीय है कि साहू समाज की गौरव भक्त शिरोमणि मां कर्मा देवी के हाथों बनी खिचड़ी खाने भगवान मंदिर के छप्पन भोग छोड़कर मंदिर के बाहर आते थे और मां कर्मा के हाथों से खिचड़ी खाते थे। एक बार जब भगवान को भोग लगाया गया और जब लोगों ने इस बात पर विश्वास नहीं किया कि भगवान एक तेलन के हाथों से खिचड़ी खाते हैं तो लोगों ने कर्मा देवी से सबूत मांगा। उसी समय भगवान को भोग लगाया गया, लेकिन उन्होंने भोग ग्रहण नहीं किया तब देवी कर्मा ने भोग में खिचड़ी लगाई और भगवान ने भोग ग्रहण किया तब से लोग मां कर्मा देवी को भगवान की अनन्य भक्त मानने लगे।

बंगाली समाज 1967 से निकाल रहा रथ यात्रा :

शहर में बंगाली समाज भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालता है। समाज ने यह परंपरा 1962 में शुरू की थी। प्रारंभ के कुछ वर्षों में यह यात्रा अग्रवाल कालोनी से निकाली जाती थी। इसके बाद करमचंद चौक स्थित सिटी बंगाली क्लब से 1967 से रथ यात्रा अनवरत जारी है। यहां समाज के लोग भक्तिभाव के साथ भगवान का रथ खींचते हैं। इसमें लोग परिवार सहित शामिल होते हैं। बंगाली क्लब में मौसी का घर बनाया जाता है। इस बार यहां रथ यात्रा में भगवान भव्य स्वरूप में नजर आएंगे। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन का निर्माण नीम की लकड़ी से पुरी धाम के समीप रघुराज के प्रकाश पात्रा एवं अन्य साथी कारीगरों द्वारा किया गया है। सचिव प्रकाश साहा ने बताया कि मंदिर और मूर्ति का निर्माण 6 माह में हो पाया।

जगन्नाथ मंदिर खमरिया :

खमरिया क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ मंदिर में एक जनवरी 2018 को प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई। यहां भी रथ यात्रा भक्तोंद्वारा भक्तिभाव के साथ निकाली जाती है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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