Jabalpur News : जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि) । हाई कोर्ट बार एसोसिएशन व मप्र जूनियर लायर्स एसोसिएशन ने फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के जरिये सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई पर बल दिया है। साथ ही इन्हें मिल रहे राजनीतिक संरक्षण की निंदा की है। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जनहित याचिका के अलावा जमीनी स्तर पर आंदोलन भी किया जाएगा।

हाई कोर्ट बार एसोएशिन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अधिवक्ता प्रशांत अवस्थी व मप्र जूनियर लायर्स एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी, असीम त्रिवेदी ने पत्रकारवार्ता में यह जानकारी दी।उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति प्राप्त कर वर्तमान में उच्च स्थानों पर पदस्थ अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। इसी वजह से दस्तावेजी सबूतों के आधार पर शिकायत के बावजूद उन्हें बर्खास्त नहीं किया गया है।

दरअसल, आरक्षित पदों पर अनारक्षित जातियों के लोगों द्वारा नौकरी अर्जित करना न केवल संविधान की मंशा का मखौल है , अपितु वास्तविक आरक्षित जातियों व अनारक्षित जातियों के साथ घोर अन्याय भी है। भारत के संविधान में आरक्षण एक अस्थायी व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को समानता के स्तर पर लाना है। लेकिन यदि वास्तविक हकदारों को आरक्षण नहीं मिल पाएगा तो यह केवल एक अनंत काल की व्यवस्था में तब्दील होकर रह जाएगी। उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग में पदस्थ एससी वर्मा पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिये सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगा था। वे मूलत: धनगर जाति से संबंधित हैं, जो ओबीसी में आती है किंतु उन्होंने धनगढ़ जाति का प्रमाण पत्र संलग्न कर अनुसूचित जनजाति के आरक्षण का लाभ ले लिया। पत्रकारवार्ता में अधिवक्ता शुभम मिश्रा, आनंद शुक्ला, वैभव पाठक, अनुपम भट्ट, पंकज तिवारी, गुलाब सिंह, संजीव पचौरी, शिवा पाठक, अजय प्रजापति, शैलेष पाठक सहित अन्य मौजूद रहे।

Posted By: Jitendra Richhariya

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