Adhik Maas 2020: बृजेश शुक्ला, जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। धार्मिक अनुष्ठानों, जप-तप और साधना के लिए हिंदू धर्म में अधिकमास अथवा अधिमास का विशेष महत्व बताया गया है। इस मास को भगवान विष्णु ने बनाया और पुरुषोत्तम नाम दिया। साधकों को इस माह का विशेष तौर पर इंतजार होता है। इस बार यह मास इसलिए विशेष बन जाएगा क्योंकि 160 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। जिसमें लीप ईयर और आश्विन अधिमास एक साथ पड़ रहा है। इसके बाद ऐसा संयोग 2039 में बनेगा।

नहीं होंगे सार्वजनिक आयोजन

प्रशासन ने भले ही धार्मिक आयोजनों के लिए गाइड लाइन जारी कर दी हो लेकिन इस मास में होने वाले आयोजन नहीं हो रहे हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण लोगों ने यह निर्णय लिया है। ऐसे में मठ-मंदिरों में होने वाली भागवत कथा और अनुष्ठान भी नहीं होंगे। सुरक्षा का ध्यान रखकर अब लोगों को कोरोना से बचकर एकांत में साधना करना पड़ेगी।

ऐसे बनता है अधिमास

सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में सामंजस्य स्थापित करने के लिए हर तीसरे वर्ष पंचांगों में एक चंद्रमास की वृद्धि कर दी जाती है। इसी को अधिमास या मलमास कहते हैं। सौर-वर्ष का मान 365 दिन, 15 घड़ी, 22 पल और 57 विपल हैं। जबकि चंद्रवर्ष 354 दिन, 22 घड़ी, 1 पल और 23 विपल का होता है। पंचांग के अनुसार आश्विन मास में अधिमास 18 सितंबर से शुरू हो रहा है। अधिमास का समापन 16 अक्टूबर को होगा।

चंद्रमास में जोड़ा अतिरिक्त मास

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि सौर वर्ष सूर्य की गति पर निर्भर करता है। चंद्र वर्ष की गणना चंद्रमा के चाल के की जाती है। एक सौर वर्ष में 365 दिन 6 घंटे होते हैं। जबकि एक चंद्र वर्ष में 354.36 दिन होते हैं। हर तीन साल बाद चंद्रमा के ये दिन एक माह के बराबर हो जाते हैं।

ज्योतिष गणना को सही बनाए रखने के लिए ही तीन साल बाद चंद्रमास में एक अतिरिक्त माह जोड़ दिया जाता है। इसे ही अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस मास में नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह आदि नहीं किए जाते हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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