जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट सुधारने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। इस बार समय से पहले परीक्षाएं आयोजित होने को लेकर विभाग ने कार्य योजना तैयार की है जिसमें स्कूलों में खास तौर पर कमजोर छात्रों को पढ़ाने के लिए मेंटर स्कूल तैयार कर पढ़ाई कराने की कवायद की जाएगी। हर एक मेंटर स्कूल के जिम्मे पांच स्कूल रहेंगे जो कि छात्रों पर नजर रखेंगे। ब्लाक एजुकेशन ऑफीसर नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे। दरअसल कोरोना की वजह से बिना परीक्षा के ही विद्यार्थियों को बोर्ड कक्षाओं में भेजा गया है। ऐसे में उनकी शैक्षणिक स्थिति कई स्कूलों में बेहतर नहीं है। क्योंकि आतंरिक परीक्षा में ही 10वीं कक्षा में 45 फीसद और 12वीं कक्षा में 31 फीसद विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हुए।

ऐसे विद्यार्थियों को अतिरिक्त ध्यान देने के लिए विभाग ने योजना बनाई है। जिले में करीब 200 हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। विभाग ने सी और डी वर्ग के कमजोर बच्चों पर फोकस किया है। सबसे पहले विभाग ने बच्चों की परीक्षा के नतीजों के आधार पर उन्हें ग्रेड में बांटा जाएगा। 45 से नीचे वाले को सी एवं 33 से 20 फीसद तक अंक के छात्रों को डी श्रेणी तथा, शून्य से 20 अंक के छात्रों को ई श्रेणी में रखा जाएगा। इन दोनों श्रेणी के लिए ही विभाग ने सुधार पर फोकस किया जा रहा है।

70 फीसद से कम पर फोकस: मॉडल स्कूल के प्राचार्य मुकेश तिवारी ने कहा कि छमाही परीक्षा में 70 फीसद से कम नंबर लेन वाले छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अभी 50 फीसद उपस्थित के आदेश है ऐसे में कमजोर विद्यार्थियों को ही नियमित बुलाया जाएगा। प्री बोर्ड की तैयारी छात्रों की क्षमताओं का आंकलन करने के लिए प्री बोर्ड का भी आयोजन किया जाएगा। कम से कम हर स्कूल में एक प्री बोर्ड कराने के लिए कहा गया है। साथ ही रिजल्ट सुधारने के लिए विषय विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। छात्रों को तैयारी के लिए लिए आवश्यक टिप्स, तैयारी आदि से अवगत करा जाएगा।

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कोविड काल के चलते बीते साल परीक्षाएं नहीं हो सकी थी। ऐसे में छात्रों को मुख्य परीक्षा में बेहतर परिणाम लाने के लिए योजना बनी है। जिसपर हम काम कर रहे हैं।

-घनश्याम सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी

Posted By: Ravindra Suhane

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