जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इन दिनों किसानों ने खेतों में रबी फसलों की बुआई शुरू कर दी है। अच्छी उपज के लिए बीज तो उपलब्ध हो गया है, लेकिन खाद की कमी लगातार बनी है। किसान इसके लिए परेशान हो रहे हैं। कृषि विभाग भले ही खाद की कमी को लेकर इंकार कर रहा है, लेकिन मौजूदा स्थिति किसानों की परेशानी बढ़ाने वाली है। अब कृषि विभाग ने खाद की कमी को देखते हुए सलाह जारी की है, जिसमें कहा गया है कि वे यूरिया और डीएपी की जगह वैकल्पिक उर्वरकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल की सलाह किसानों को दी है। विभाग के मुताबिक किसान डीएपी के स्थान पर स्वास्थ्य मृदा कार्ड की अनुशंसा के आधार पर सिंगल सुपर फास्फेट, एनपीके एवं अमोनिया फास्फेट सल्फेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं यूरिया के स्थान पर इफको द्वारा तैयार किये गये नैनो तकनीक आधारित नैनो तरल यूरिया का इस्तेमाल कर सकते है। विभाग के अनुभवियों का मानना है कि इन उर्वरकों का उपयोग करने से जहां कृषि की लागत कम होगी वहीं गुणवत्ता और उत्पादन पर कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास डॉ. एसके निगम ने बताया कि जिले में रबी फसलों की बोनी अक्टूबर माह से दिसंबर तक की जाती है। इस समय किसान को बीज तथा उर्वरक का ध्यान देना होता है। किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि कौन सी खाद, कब, किस विधि से एवं कितनी मात्रा में देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषक डीएपी एवं यूरिया का ज्यादा प्रयोग करते है। डीएपी की बढ़ती मांग एवं ऊंचे रेट से कृषकों को कई बार समस्या का सामना करना पड़ता है।

Posted By: Ravindra Suhane

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