जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि । रेलवे ने ट्रेनों की संख्या और गति बढ़ाने पर जोर दिया। इसका फायदा अभी तक यात्री को नहीं मिल रहा है। जबलपुर रेल मंडल की ट्रेनों पर भी इसका असर नहीं दिखाई दिया। जबलपुर आने वाली ट्रेनों की सुस्त चाल से यात्री बेहाल हैं। यात्री ट्रेनों को कभी भी, कहीं भी आउटर पर घंटों खड़ा कर दिया जा रहा है। मंगलवार को भी अंबिकापुर से जबलपुर आ रही अंबिकापुर इंटरसिटी के साथ ऐसा ही हुआ। इस ट्रेन को कटनी साउथ के पास सुनसान इलाके में खड़ा कर दिया गया। जहां ट्रेन खड़ी की गई, वहां आसपास यात्रियों के लिए पीने के लिए न तो पानी था और न ही वहां से पैदल जाने का कोई रास्ता। ट्रेन यहां लगभग दोपहर दो से ढाई घंटे तक खड़ी रही। जनरल और स्लीपर कोच में बैठे यात्री गर्मी से बेहाल रहे।

58 किमी का सफर चार घंटे में -

अंबिकापुर ट्रेन को जबलपुर दोपहर लगभग 2.40 बजे पहुंचना था। ट्रेन उमरिया से कटनी के बीच भी रेंगती रही। हालात यह थी कि उमरिया से कटनी का 58 किमी का सफर ट्रेन ने लगभग चार घंटे में तय किया। इस बीच ट्रेन को कहीं भी किसी भी समय आउटर पर खड़ा कर दिया गया। यात्री गर्मी और प्यास से बेहाल होते रहे। रेलवे ने मदद से दूर, उनकी शिकायत तक को गंभीरता से नहीं लिया। स्लीपर कोच में सफर करने वाले यात्रियों ने बताया कि यह हालात हर दिन इंटरसिटी में बनते हैं। मंगलवार को तो हद हो गई। स्टेशन से कई किमी दूर इसे सुनसान इलाके में घंटों खड़ा किया गया।

शाम छह बजे जबलपुर पहुंची ट्रेन

ट्रेन की धीमी गति से चलने की वजह से यह ट्रेन जबलपुर शाम लगभग छह बजे पहुंची। इस दौरान ट्रेन के कई यात्रियों को जबलपुर से दूसरी ट्रेन पकड़ना था, लेकिन देरी से यहां पहुंचने की वजह से वह छूट गई। यही हाल शक्तिपुंज का था। इस ट्रेन के यात्री भी इन दिनों ट्रेन की सुस्त चाल और आउटर पर घंटों खड़े रहने से परेशान हैं। यह ट्रेन को अपने निर्धारित समय दोपहर 2.20 बजे जबलपुर पहुंचना होता है, लेकिन यह ट्रेन कभी शाम 6 बजे तो कभी रात 8 से 9 बजे आ रही है। मंगलवार को भी यह ट्रेन शाम लगभग साढ़े चार बजे पहुंची।

डबल लाइन बिछने से आ रही परेशानी

सिंगरौली से कटनी होकर जबलपुर आने वाली अधिकांश ट्रेनों के देरी से आने को लेकर रेलवे के मुताबिक इस ट्रैक का दोहरीकरण किया जा रहा है। दोहरीकरण की वजह से ट्रैक में छोटे-छोटे स्तर पर काम किया जा रहा है। जहां काम चल रहा है, वहां ट्रेन की रफ्तार को धीमा किया गया है तो वहीं जहां ट्रैक बन गया, वहां गति सामान्य है। ट्रेनों के देरी से चलने से हो रही परेशानी दोहरीकरण का काम खत्म होने तक रहेगी। इसमें एक से डेढ़ साल का वक्त लगेगा।

Posted By: Jitendra Richhariya

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