जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भाद्र शुक्लपक्ष आठ सितंबर से प्रारंभ होकर 20 सितंबर को समाप्त हो जाएगा। यानी यह पक्ष मात्र 13 दिन का है। सामान्यतया पक्ष 15 दिन का होता है परंतु जब तिथि की वृद्धि हो जाती है तो वही पक्ष 16 दिन का हो जाता है, और जब कभी तिथि का ह्रास हो जाता है तो वही पक्ष 14 दिन का हो जाता है, किंतु 13 दिन का पक्ष हजारों वर्षों बाद आता है। इस बार दो तिथियां द्वितीय और त्रयोदशी का क्षय हो गया है। अत: यह पक्ष मात्र 13 दिन का रहेगा। इसे विश्व घस्र पक्ष कहते हैं।

शंकराचार्य आश्रम रायपुर से जबलपुर प्रवास में आए नगर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य (फलित) डा. इन्दुभवानंद महाराज एवं ब्रह्मचारी चैतन्यानंद महाराज ने बताया कि यह बहुत बड़ा दुर्योग है, हजारों वर्ष बाद ऐसा दुर्योग आता है। महाभारत युद्ध के पहले 13 दिन के पक्ष का दुर्योग काल आया था, जिससे बड़ी जनधन हानि हुई थी तथा घनघोर युद्ध भी हुआ था।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार- पक्षस्य मध्ये द्वितिथि पतेतां, यदा भवेद्रौरव काल योग:। पक्षे विनष्टं सकलं विनष्ट, मित्याहुराचार्यवरा: समस्ता:।।" पक्ष के मध्य में यदि दो तिथियों की हानि होती है तो यह रौरव काल संज्ञक दुर्योग होता है। ज्योतिष शास्त्र में इसकी बड़ी निंदा की गई है। ऐसा दुर्योग हजारों वर्षों बाद प्राप्त होता है। इसके प्राप्त होने से अतिवृष्टि, अनावृष्टि, राजसत्ता का परिवर्तन, विप्लव, वर्ग भेद आदि उपद्रव होने की संभावना वर्ष पर्यंत तक रहती है।

आचार्यों का मत है कि- त्रयोदशदिने पक्षे तदा संहरते जगत, अपिवर्षसहस्रेण कालयोग:प्रकीर्तित:।

समस्त प्रकृति को पीड़ित करने वाला यह दुर्योग संक्रामक रोगों की भी वृद्धि कर सकता है। अत: यत्न पूर्वक इस पक्ष का मांगलिक कार्य, व्रतारम्भ, उद्यापन, भूमि भवन का क्रय विक्रय, गृह प्रवेश आदि शुभकार्यों में भी इस दुर्योग का सर्वथा परित्याग कर देना चाहिए।

Posted By: Brajesh Shukla

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