जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। प्लेटफार्म पर खड़े हों या फिर ट्रेन में सफर कर रहे हो, भूख लगते ही आप वेंडरों को तलाशने लगते हैं, ताकि उनसे खाना खरीदकर अपनी भूख मिटा सके। यह सच है कि यात्री और खाने के बीच की एक कड़ी का काम वेंडर को सौंपा गया है, लेकिन इस जिम्मेदारी को सौपने वाला रेलवे इन दिनों उनसे खुद परेशान है। खाने को लेकर वैध वेंडरों के बीच हो रहे विवाद ने रेलवे का भी सिर दर्द बढ़ा दिया है। वेंडरों के बीच हो रहे विवाद मारपीट और चाकूबाजी तक आ पहुंचा है।

नईदुनिया ने वेंडरों के बीच बढ़ते विवाद की हकीकत जाननी चाही तो पता चला कि स्टेशन पर वेंडरों की बढ़ी संख्या और आपस में खाना बेचने को लेकर प्रतिस्पर्धा, विवाद की दो मुख्य वजह हैं।

ऐसे समझें: पहला- दोगुने हुई वेंडर की संख्या- रेलवे ने स्टेशन पर स्टॉल की संख्या के साथ इनमें तैनात वैध वेंडर की संख्या भी बढ़ा दी है। पहले खाने के एक स्टॉल में आठ वेंडर और दो मैनेजर होते थे, लेकिन रेलवे ने अपनी आय बढ़ाने के लिए इनकी संख्या 18 कर दी है, जिससे पहले की तुलना में स्टेशन पर वेंडर की संख्या दोगुनी हो गई है।

दूसरा- एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा- स्टेशन पर जितने स्टॉल हैं, उनके संचालक अलग-अलग हैं। सभी आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। कई बार दूसरे स्टॉल का वेंडर अन्य किसी स्टॉल के सामने खड़ा होकर खाना बेचता है, जिससे विवाद की स्थिति बनती है। जबलपुर स्टेशन पर दीवाली की रात वेंडर के बीच हुई चाकूबाजी की भी यही वजह थी।

यह भी है कारण: बिरयानी को लेकर विवाद- इन दिनों वेंडरों के बीच सबसे ज्यादा विवाद बिरयानी को लेकर हो रहा है। स्टॉल संचालक बताते हैं कि इसमें ज्यादा मुनाफा होता है। चावल और दो अंडे बनने वाली एक बिरयानी की लागत लगभग 18 से 20 स्र्पये आती है। रेलवे का दाम 70 स्र्पये है, लेकिन भीड़ के दौरान ज्यादा बेचने के लिए यह 25 स्र्पये तक बिरयानी बेच देते हैं।

बेचने का दायरा तय नहीं- प्लेटफार्म एक पर तैनात वेंडर, दो पर भी खाना बेचने चला जाता है। इन्हें रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में कमर्शियल विभाग और आरपीएफ के पास स्टॉफ ही नहीं। कई बार अपराधिक प्रवृत्ति के वेंडर कर्मचारी-अधिकारियों को भी धमका देते हैं।

जबलपुर समेत तीनों मंडल में शुरू अभियान: पश्चिम मध्य रेलवे के कमर्शियल विभाग ने स्टेशन और ट्रेन में खाने की गुणवत्ता सुधारने के साथ वेंडरों के विवादों को रोकने के लिए जांच अभियान शुरू कर दिया है। जबलपुर के बाद अब भोपाल और कोटा रेल मंडल में स्टेशन और ट्रेनों में जाकर रेलवे के जांच अधिकारी खाने की जांच करेंगे। वहीं वहां तैनात वेंडरों को पुलिस और मेडिकल प्रमाण पत्र की जांच करेंगे। गड़बड़ी होने पर मौके पर ही कार्रवाई करने के निर्देश पमरे जोन ने दे दिए हैं।

कम होगी वेंडर की तय संख्या: जबलपुर रेल मंडल में बढ़ते वेंडर के विवादों को रोकने के लिए कारणों की समीक्षा की गई। इस दौरान वेंडरों की संख्या कम करने का सुझाव सामने आया है। कमर्शियल विभाग ने पश्चिम मध्य रेलवे जोन के कमर्शियल विभाग को वेंडरों की तय संख्या कम करने का प्रस्ताव भेजा है। यदि प्रस्ताव पर सहमति बन जाती है तो तय संख्या में 25 फेीसदी तक की कटौती की जाएगी। अभी जबलपुर रेलवे स्टेशन में 300 वेंडर हैं।

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- जबलपुर, भोपाल और कोटा रेल मंडल में आरपीएफ द्वारा अभियान चलाकर वेंडरों की जांच की जाती है। यात्रियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। आरपीएफ की जांच से बेहतर परिणाम भी मिले हैं।

प्रदीप कुमार गुप्ता, आईजी, आरपीएफ, पमरे

- वेंडरों को पुलिस सत्यापन किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर तैनात वेंडर की तय संख्या में कटौती की जा सकती है। खाने की जांच के लिए मंडल में लगातार अभियान चल रहा है।

विश्वरंजन, सीनियर डीसीएम, जबलपुर रेल मंडल

Posted By: Ravindra Suhane

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