जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले के मद्देनजर शहर की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला दंडाधिकारी व कलेक्टर भरत यादव ने शहर को 36 सेक्टर में बांटते हुए वहां विभिन्न विभागों के अधिकारियों को मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात कर दिया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के तहत प्रत्येक सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने से संबंधित क्षेत्र में लगातार भ्रमण कर कानून व्यवस्था की स्थिति पर नजर रखेंगे और किसी भी प्रकार की घटना की सूचना मिलने पर तत्काल संबंधित अनुविभागीय दंडाधिकारी को सूचना देंगे।

सोशल मीडिया पर नजर रखेगा कोर ग्रुप

इसी तरह वाट्सएप, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के सभी माध्यमों पर प्रसारित आपत्तिजनक संदेशों, आडियो-वीडियो, चित्रों पर भी नजर रखी जाएगी। इसके लिए सोशल मीडिया कोर ग्रुप का भी गठन किया गया है। कलेक्टर ने सोशल मीडिया कोर ग्रुप की कमान डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी को सौंपी है। कोर ग्रुप पुलिस सायबर सेल एवं पुलिस कंट्रोल रूम से समन्वय बनाकर सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने, वैमनस्यता पैदा करने तथा धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली सूचनाएं, संदेश, आडियो-वीडियो एवं चित्र प्रसारित करने वाले तत्वों पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई करेगा।

अयोध्या राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर हिंदू-मुस्लिम झगड़ा नहीं करेंगे, लेकिन नेताओं का कुछ नहीं कहा जा सकता है। राजनीति को बढ़ावा देने के लिए नेता देश में कुछ भी करा सकते हैं। अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि में मस्जिद कभी थी ही नहीं। सालों पहले कार सेवकों ने अयोध्या में मस्जिद नहीं तोड़ी थी, बल्कि मंदिर तोड़ा था। सिविक सेंटर स्थित बगलामुखी मंदिर में आयोजित पत्रकार वार्ता में जगतगुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि अयोध्या में मस्जिद का कोई अस्तित्व ही नहीं है। न तो कभी बाबर आया और न ही उसका कोई कर्मचारी।

यहां मस्जिद के बारे में न तो हुमायूं ने कोई चर्चा की है और न ही अकबर ने भी मस्जिद का कोई उल्लेख कभी किया। गोस्वामी तुलसीदास ने भी वहां मस्जिद है, इसकी कोई चर्चा नहीं की। औरंगजेब के जमाने में मंदिरों की तोड़फोड़ हुई। लेकिन बाबरी मस्जिद तब भी वहां नहीं बन पाई।

धनुर्धर राम नहीं, माता कौशल्या की गोद में दिखेंगे रामलला

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि अयोध्या में गर्भ गृह से राममंदिर का निर्माण होगा और अयोध्या में धनुर्धर राम नहीं माता बल्कि कौशल्या की गोद में बैठे रामलला नजर आएंगे और इसी तर्ज पर मंदिर का निर्माण कार्य कराया जाएगा।

सरयू किनारे स्मारक नहीं आराध्य मंदिर बने

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि अयोध्या में सरयू किनारे मर्यादा पुरुषोतम की विशाल प्रतिमा नहीं बल्कि जन्मभूमि में आराध्य राम का मंदिर बनना चाहिए। यही देशवासियों का मत है। उन्होंने कहा कि भगवान राम मनुष्य नहीं थे जिससे उनका स्मारक बने। शंकराचार्य ने कहा कि सरयू में भगवान राम ने देह त्यागी थी, वहां प्रतिमा स्थापित करने का क्या औचित्य। राम मंदिर निर्माण संत महात्माओं व रामजन्मभूमि रामालय न्यास पुनरुद्धार समिति के पर्यवेक्षण में हो।

किसी धर्म के विरोधी नहीं

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि वे किसी धर्म के विरोधी नहीं हैं परंतु जिन धर्मों के व्यक्तियों को जहां स्थान मिला है वह वहां जाकर अपने भगवान की आराधना करें। रामजन्म भूमि हिंदुओं की है इसलिए अयोध्या में राममंदिर बनना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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