जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अब्दुल रज्जाक को फर्जी स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर और धमकी देकर एफआईआर वापस लेने के मामले में जमानत दे दी। न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने कहा कि इस मामले में रज्जाक का सीधा संबंध परिलक्षित नहीं होता। आपराधिक रिकार्ड के संबंध में पूर्व में कई बार चर्चा हो चुकी है। आवेदक के खिलाफ दो बार एनएसए की कार्रवाई निरस्त हो चुकी है। ऐसी स्थिति में आवेदक को जमानत का लाभ दिया जा सकता है। मोहम्मद सब्बीर ने हनुमानताल थाने में रज्जाक व अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसका कहना था कि रज्जाक और उसके बेटे सरताज के इशारे पर उसे अगवा किया गया, फर्जी स्टाम्प पर साइन कराए गए और धमकी देकर एफआईआर वापस करवाई गई। वहीं आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने पक्ष रखा।

उन्होंने दलील दी कि शिकायतकर्ता आदतन ब्लैकमेलर है। वह पैसों के लिए फर्जी मामले दर्ज कराता है। पूर्व में भी उसने कई मामले दर्ज कराए हैं और बाद में वह आरोपों से मुकर जाता है। उन्होंने कहा कि यदि उसे धमकी देकर पुलिस के पास लेकर गए थे तो वह पुलिस को यह बात बता सकता था। वहीं आपत्तिकर्ता की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने दलील दी कि भले ही घटना के समय रज्जाक जेल में बंद था, लेकिन उसके नाम से शिकायतकर्ता को देश के अलग-अलग जगहों से धमकी भरे 20 फोन काल आए। आवेदक को जमानत दी तो वह साक्ष्यों को प्रभावित करेगा। मामले पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने 15 दिन के भीतर पासपोर्ट जमा करने और ट्रायल कोर्ट में नियमित पेशी पर हाजिर होने की शर्त पर अब्दुल रज्जाक की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।लंबे समय से जेल में बंद रज्जाक को इस आदेश से राहत मिली है। अन्य मामलों में जमानत के साथ उसके जेल से बाहर आने की उम्मीद जाग गई है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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