जबलपुर। Balancing Rock Jabalpur शहर में स्थित ग्रेनाइट चट्टानों की पहाड़ियां न केवल जबलपुर बल्कि विश्व पटल पर विख्यात हैं। मदन महल पहाड़ी पर स्थित बैलेंसिंग रॉक एशिया के तीन बैलेंस रॉक में शामिल है। ये तीनों भारत के ही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस बैलेंसिंग रॉक के नाम से दुनिया जबलपुर को जानती है उससे भी बड़े-बड़े और अचंभित कर देने वाले बैलेंसिंग रॉक जबलपुर में स्थित अन्य पहाड़ियों में हैं जो दूसरे नागरिकों की नजरों से दूर हैं। ऐसे ही कई बैलेंसिंग रॉक (स्थिर शिला) को नईदुनिया द्वारा पर्यटकों की नजर में लाने की मुहिम चलाई जा रही है ताकि जबलपुर में सभी बैलेंसिंग रॉक को अलग-अलग पहचान मिल सके और जबलपुर का नाम पर्यटन केंद्र के रूप में और ऊंचा हो सके।

शुक्रवार को नईदुनिया ने नयागांव स्थित बिजली कंपनी के केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान के पीछे स्थित पहाड़ी में छिपे पत्तीनुमा आकार के विशालकाय आकार के बैलेंसिंग रॉक का खुलासा किया था। इसी तरह आज एक और बड़े बैलेंसिंग रॉक का खुलासा किया जा रहा है। यह बैलेंसिंग रॉक नयागांव की ठाकुरताल पहाड़ी के जंगलों के बीच है। यह पहाड़ी वन विभाग के अधीन आती है, जिसे संरक्षित किया गया है।

डेढ सौ हेक्टेयर में फैली सुंदरता

ठाकुरताल की पहाड़ी लगभग डेढ़ सौ हैक्टेयर में फैली है। यहां पहाड़ी के नीचे वन विभाग द्वारा सुरक्षा चौकी भी स्थापित की गई है। रामपुर चौक से 5 किलोमीटर दूर नयागांव सोसायटी के पास से लगभग 1 किलोमीटर पहाड़ी में जाने से यहां कई बैलेंसिंग रॉक पर्यटक देख सकते हैं। मप्र विद्युत ट्रांसमिशन कंपनी के नयागांव सब स्टेशन के पास से पहाड़ी की ओर जाने का रास्ता है।

भूगर्भशस्त्री की नजर में

साइंस कॉलेज के भूगर्भशास्त्री बीएस राठौर के अनुसार जबलपुर के आसपास जो पहाड़ी हैं उनकी अपनी ही पहचान है। यह चट्टानें करोड़ों वर्षों पूर्व से टिकी हुई हैं। उन्होंने बताया कि खासतौर पर ग्रेनाइट की ये चट्टानें मैग्मा के जमने से निर्मित हुई होंगी। दूर से देखने पर यह बैलेंसिंग रॉक जैसे नजर आते हैं। इने विज्ञान की भाषा में ग्रेनाइट बॉक्स कहा जाता है। ग्रेनाइट चट्टान होने के दो से तीन कारण होते हैं। धरती की उत्पत्ति के समय ही कई बार चट्टानें धरती के अंदर जाती हैं जो कि पिघलकर आग्नेय चट्टान का रूप लेते हुए बाहर आती हैं और ठंडा होने पर वैसे ही स्वरूप में जम गईं। दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि लावा धरती के ऊपर आने की कोशिश करता है और वह नहीं आ पाता है। बाद में वह ठंडा होकर जमना शुरू हो जाता है। ये चट्टानें उसी प्रकृति की है। इनमें दरारें बन जाती हैं जिन्हें संधि कहते हैं, जिनमें दो ब्लॉक आपस में जुड़े होते हैं। यही इनमें खासियत होती है। दूर से देखने में यह बैलेंसिंग रॉक नजर आते हैं लेकिन यह एक ही चट्टान होती है। कई चट्टान टूटकर अलग हो जाती है लेकिन कई चट्टानें लाखों वर्षों से टिकी हुई हैं। जबलपुर में ऐसी कई चट्टानें हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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